उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने और कथित तौर पर विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों की जांच सीबीआई से कराने की गुहार संबंधी याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता वकील एम एल शर्मा से सवाल किया कि आखिरकार उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने से वह किस तरह से प्रभावित है?
पीठ ने पूछी हैसियत
पीठ ने कहा कि आखिर आपने किस हैसियत से यह याचिका दाखिल की। पीठ ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि क्या आप उत्तराखंड के रहने वाले हैं? आपका इससे क्या मतलब है? पीठ ने कहा कि अगर कहीं भी कुछ हो रहा हो, एमएल शर्मा जनहित याचिका दाखिल कर देते हैं।
पीठ ने शर्मा से कहा कि अगर आप इस तरह की जनहित याचिका दायर करेंगे तो आपकी साख खराब होगी। पीठ ने कहा कि राजनीति उत्तराखंड में हो रही है, हमें उससे कोई सरोकार नहीं है। अगर कभी ऐसी स्थिति हुई जहां संवैधानिक सवाल उठे तो हम जरूर उस पर परीक्षण करेंगे। लेकिन बिना इस तरह की स्थिति आए हम इस तरह के मामलों पर क्यों गौर करें।
पीठ ने दो टूक कहा कि हम ऐसा कतई नहीं कर सकते। पीठ ने कहा कि कहीं भी कोई विवाद चल रहा हो, आप सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर देते हैं। इसके बाद एडवोकेट एम एल शर्मा ने याचिका वापस ले ली।