उत्तराखंड में गन्ना किसानों के सामने इस बार भी परेशानी की स्थिति बनी रहेगी।
पिछला बकाया बहुत है और चीनी उत्पादन में प्रति क्विंटल इस बार का घाटा पहले से ज्यादा ही रहने की आशंका है। वैसे भी चीनी उद्योग को किसी तरह की मदद देना राज्य के हाथ में कम और केंद्र के हाथ में ज्यादा है।
राष्ट्रीय बाजार में चीनी के दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं
पिछले तीन वर्षों में राष्ट्रीय बाजार में चीनी के दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। किसान ने पिछले चार साल में गन्ने की फसल के चक्कर में अपना काफी नुकसान भी किया। गेहूं व अन्य फसलों में गिरावट आई।
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उधर शुगर इंडस्ट्री चीनी के दाम नहीं बढ़ने से घाटे की तरफ अग्रसर हो गई। राज्य के गन्ना किसानों का पिछले पेराई सत्र का 80 करोड़ रुपए तीन निजी चीनी मिलों पर बकाया है।
सरकार चीनी मिलों को राहत देकर उबारने की एक्सरसाइज तो कर रही है, लेकिन किसानों के लिए कोई योजना अभी नजर नहीं आ रही है।
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चीनी मिलों को कुछ राहत देने की एक्सरसाइज शुरू की है। परचेज टैक्स में कटौती के साथ ही शीरा के निर्यात का कोटा बढ़ाए जाने की तैयारी हो रही है।
इस बात की संभावना है कि एक क्विंटल चीनी के उत्पादन पर 4200 रुपए का खर्चा होगा। जबकि मौजूदा समय में चीनी का मूल्य 2900 रुपए क्विंटल है।
मिल सकती है ये छूट
- कुल गन्ना मूल्य का दो प्रतिशत परचेज टैक्स के रूप में सरकार को जाता है, इसे कम किया जाएगा।
- गन्ना मूल्य का तीन प्रतिशत गन्ना विकास समितियों को जाता है, इसे भी कम करने की तैयारी है।
- अभी तक चीनी मिलें 20 प्रतिशत शीरा निर्यात करती है, इसे बढ़ाकर 40 फीसदी करने की तैयारी।
ऐसा रहा गत वर्ष का पेराई सत्र
- निजी क्षेत्र की चीनी मिलों ने 207 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की
- सरकारी क्षेत्र की चीनी मिलों ने 170 लाख क्विंटल की पेराई की
- सरकारी चीनी मिलों में 14 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ
- निजी क्षेत्र की चीनी मिलों ने 19 लाख क्विंटल चीनी बनाई
- लक्सर, लिब्बरहेड़ी व इकबालपुर चीनी मिल पर किसानों का 80 करोड़ बकाया है
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