शुगर फ्री आलू अब न केवल सेहत बल्कि आपका घर भी संवारेगा। जी हां, मौसम अनुकूल रहा तो आने वाले कुछ समय में सेंचुरी एरिया क्षेत्र में बसे गांवों में शुगर फ्री आलू की खेती काश्तकारों की आजीविका का मुख्य जरिया होगी। वन विभाग ने उद्यान विभाग की मदद से नि:शुल्क आलू के बीज गांवों को दे दिया है।
सेंचुरी एरिया के ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से वन विभाग ने कैट प्लान में सब्जी व फलोत्पादन को भी शामिल किया है। इस योजना के तहत जिले के अंतिम गांव गौंडार सहित गौरीकुंड, रांसी, चिलौंड, गडगू, तोषी और लुंथरा में शुगर फ्री आलू के बीज बांटे गए हैं। यहां प्रत्येक परिवार को 2 से 5 किलो बीज नि:शुल्क दिया गया है।
ग्राम पंचायत गौंडार की प्रधान सुमन देवी का कहना है कि उन्हें 5 कुंतल शुगर फ्री आलू का बीज मिला था, जिसे 72 परिवारों में बांटा गया है। कम से कम दो नाली खेती में इसकी बुआई की गई है। कुछ काश्तकारों ने पांच-पांच नाली भूमि पर भी आलू की खेती की शुरूआत की है। तोषी गांव में कई ग्रामीणों ने अपने खेतों में 15 किलो तक आलू का बीज बोया है। क्षेत्र के अन्य गांवों में भी आलू की खेती को लेकर काश्तकारों में उत्साह दिख रहा है।
सेब की पौध कराई गई उपलब्ध
वन विभाग की ओर से गौरीकुंड, गौंडार, रांसी, त्रियुगीनारायण और तोषी गांव में 18 सौ सेब की पौध भी उपलब्ध कराई हैं। गोल्डन और रॉयल प्रजाति का के सेब की पौध हिमाचल से मंगाई गई है।
सेंचुरी एरिया के गांवों में ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से कैट प्लान के तहत शुगर फ्री आलू का उपलब्ध कराया गया है। आलू पिथौरागढ़ से मंगाया था। इसके अलावा गांवों में प्रति परिवार पांच-पांच पौध सेब भी वितरित किया गया है।
शंकर लाल, रेंजर, केदारनाथ वन प्रभाग, ऊखीमठ रेंज
शुगर फ्री आलू विशेषकर कुपरी ज्योति प्रजाति का है। यह स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभकारी है। ऐसे में गैस या शुगर से पीड़ित लोग भी इसका मनचाहा उपयोग कर सकते हैं।
जीएल मखनवाल, जिला उद्यान अधिकारी रुद्रप्रयाग