फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इस स्कूल के बच्चों ने पहली बार देखी ईंट

Wed, 12 Feb 2014 05:08 PM IST
जीवन दानू/अमर उजाला, नाचनी (पिथौरागढ़)
विज्ञापन
विज्ञापन
उच्च हिमालयी क्षेत्र में 10000 फीट की ऊंचाई पर स्थित नामिक हाईस्कूल में पढ़ने वाले 99 बच्चों में से 70 ने पहली बार ईंटें देखीं। इन बच्चों को पता ही नहीं था कि ईंट क्या होती है।
विज्ञापन


पढ़ें,फॉरेस्ट गार्ड भर्ती घोटाले की जांच में 'घोटाला'

दरअसल, शिक्षक भगवान सिंह एक दिन जब सातवीं कक्षा के बच्चों को ‘ईंट का जवाब पत्थर से’ मुहावरे का अर्थ समझा रहे थे तो बच्चों ने पूछ लिया कि गुरु जी ये ईंट क्या और कैसी होती है?

पढ़ें,कमजोर हो रही है उत्तराखंड की रीढ़

बच्चों के सवाल सुनते ही भगवान सिंह ने सोच लिया कि वे बच्चों को ईंट जरूर दिखाएंगे।

ईंट के ल‌िए गुरुजी गए 27 किमी दूर

एक तरफ जहां हम अपने बच्चों के सवालों को नजरअंदाज कर तरह-तरह के बहाने बना लेते हैं वहीं भगवान सिंह बच्चों को ईंट दिखाने क‌े ल‌िए 27 किमी दूर नाचनी पहुंच गए।

पढ़ें,कमजोर हो रही है उत्तराखंड की रीढ़

नाचनी से तीन-तीन किलो की दो ईंटें लेकर स्कूल पहुंचे और देहरादून निवासी शिक्षक ओम प्रकाश यादव से बच्चों को ईट के बारे में जानकारी देने के कहा।

पढ़ें,बदरीनाथ रावल के 'ब्रह्मचर्य' पर छिड़ी बहस

इसके बाद श्री यादव ने बच्चों को ईंट बनाने की प्रक्रिया और इसकी उपयोगिता के बारे में बताया।

70% बच्चों ने नहीं देखी थी ईंट

स्कूल में प्राथमिक के 56 और हाईस्कूल के 43 बच्चों में से तीस प्रतिशत यानी करीब 29 बच्चों ने ही पिथौरागढ़ और बागेश्वर में ईट से बने घर देखे थे। शेष 70 बच्चों ने पहली बार ईटें देखीं।

1962 में खुला था स्कूल
मुनस्यारी के द्वालीगाढ़ से 27 किमी की पैदल दूरी और बागेश्वर जिले के गोगिना से आठ किमी की दूरी पर स्थित 118 परिवार वाले नामिक में 1962 में राजकीय प्राथमिक स्कूल खोला गया।

पढ़ें,हैंडसम दिखने के चक्कर में कहीं बन ना जाएं नपुंसक

1996 में इसे अपग्रेड कर जूनियर हाईस्कूल बनाया गया और 2011 में भाजपा शासनकाल में इसे हाईस्कूल कर दिया गया।
विज्ञापन

और भी हैं स्कूल की दुश्वारियां

स्कूल का दर्जा तो बढ़ा दिया गया लेकिन शिक्षक और स्टाफ नहीं बढ़ाया। हाईस्कूल को जूनियर हाईस्कूल का शिक्षक संचालित कर रहा है।

पढ़ें,आया था सिफारिश करने, पहुंच गया हवालात

नामिक के लोग कई बार यहां शिक्षक तैनात करने की मांग कर चुके हैं और आज भी इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं।

क्या कहते हैं विधायक
बगैर पद सृजित किए स्कूल का दर्जा बढ़ाकर भाजपा ने नामिक के लोगों से छल किया। मुख्यमंत्री के सामने पूरा मामला रखा जा रहा है। मुख्यमंत्री हरीश रावत जल्द पद सृजन, तैनाती के साथ ही अन्य सुविधाओं का तोहफा नामिक के लोगों को देंगे।
-हरीश धामी विधायक धारचूला।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें