फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कलक्ट्रेट, तहसील में ठप हुआ कामकाज

Tue, 03 Dec 2013 03:44 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
सोमवार को देहरादून स्थित तहसील में काम कराने आए सैकड़ों लोगों को निराश होकर घर जाना पड़ा।
विज्ञापन


न तो किसी का प्रमाणपत्र बना, न ही खारिज-दाखिल या अन्य कोई कार्य हो पाया। लोगों की परेशानी की वजह थी कलक्ट्रेट मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ और स्टेनोग्राफर संघ से जुड़े कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार।

अपनी मांगों के समर्थन में कर्मचारी अब आठ दिसंबर तक कलक्ट्रेट और तहसील में कामकाज नहीं करेंगे। इस कारण लोगों को ऐसी ही परेशानियों से दो चार होना पड़ेगा।
विज्ञापन


कोई सुन नहीं रहा
तहसील में पहचान पत्र बनवाने आए निरंजनपुर निवासी अशोक को कर्मचारियों ने यह कहकर घर भेज दिया कि फॉर्म खत्म हो गए हैं। वह 25 तारीख को आएं। अशोक ने बताया कि उन्हें जल्द ही पहचान पत्र की जरूरत है, लेकिन यहां उनकी कोई सुन ही नहीं रहा है।

भंड़ारीबाग से आए 70 वर्षीय हीरालाल को कर्मचारियों ने अगले मंगलवार आने की सलाह दी। हीरालाल को मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता पाने के लिए आवेदन करना था। लेकिन कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार की वजह से वह बिना आवेदन किए ही चले गए।

उनकी मांगों की अनेदखी
उत्तराखंड कलक्ट्रेट मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ के प्रांतीय महामंत्री आशीष वर्मा ने बताया कि सरकार लगातार उनकी मांगों की अनेदखी कर रही है। कार्य बहिष्कार का नोटिस दिया था, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। सरकार नहीं चेती तो पूरे प्रदेश में बेमियादी हड़ताल की जाएगी।

उत्तराखंड कलक्ट्रेट स्टेनोग्राफर संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम सिंह ने बताया कि पूरे सेवा काल के दौरान एक भी पदोन्नति नहीं दी जाती। उनकी मांग है कि सेवाकाल के दौरान एक बार तहसीलदार या डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदोन्नति दी जाए।

बिना हड़ताल पटवारी गायब
भारनवाला टर्नर रोड से तहसील आए दीपक और उनकी पत्नी घंटों तक पटवारी का इंतजार करते रहे। बाद में उन्हें बताया गया कि पटवारी आज नहीं आएंगे। दीपक ने बताया कि दीपावली से पहले उन्होंने जमीन के कागज बनवाने के लिए पटवारी को दिए थे जो आज तक नहीं मिले।
विज्ञापन


मेरी पत्नी कई बार चक्कर लगा चुकी है। लेकिन पटवारी मिलता ही नहीं है। यह केवल एक दीपक की समस्या नहीं है। तहसील के अन्य अधिकारी और कर्मचारियों का भी पटवारियों जैसा ही हाल है। लोग दूर-दूर से अपना काम करवाने आते हैं लेकिन बदले में उन्हें अगले दिन आने का जवाब मिलता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें