रोजे रखने वालों के जिस्म की सेहत अच्छी हो जाती है। इससे रूह को ताजगी मिलती है।
यह होते हैं फायदे
बुराइयों की वजह से व्यक्ति के दिल में आने वाले गंदे ख्याल खत्म हो जाते हैं। रोजे एक व्यक्ति की बदख्याली के खिलाफ जंग है। शहर काजी मोहम्मद अहमद कासिमी ने बताया कि लोगों को रमजान का एहतराम करना चाहिए।
उलेमा का कहना है कि इंसान के जिस्म के हर हिस्से का रोजा होता है। हाथ कोई बुरा काम न करे, पैर गुमराही की तरफ न बढ़ें, जुबान नशीली चीजों का स्वाद न लें।
झूठ न बोलें। मां-बाप की फरमाबरदारी करें। उनसे मोहब्बत से पेश आएं। शहर काजी कासिमी ने कहा कि लोग अपने पड़ोसियों का ख्याल रखें। उनकी वजह से किसी को दिक्कत न हो। गरीबों की मदद करें।
शहर के कई क्षेत्रों में अलग-अलग सामूहिक रोजा इफ्तार का आयोजन किया गया। इसके अलावा लोगों ने मसजिदों में रोजा खोला।
इसके अलावा लोगों ने अपने घरों में अपने नाते-रिश्तेदारों को बुलाकर रोजा इफ्तार पार्टी का आयोजन किया।
रमजान में हुईं पांच घटनाएं
जंग-ए-बदर हुई
मक्का फतह
वर्ष 1187 में जेरुसलम फतह
वर्ष 711 में स्पेन फतह
सुल्तान कुतुज ने मंगोलों का हराया