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जिस राज्य के लिए सब कुछ झोंका, उसने क्या दिया?

Sat, 03 Oct 2015 01:02 PM IST
रेनू सकलानी/अमर उजाला, देहरादून
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बच्चे जब मुझे सुनवाई के लिए जाते देखते हैं तो उनके सवालों का जवाब देना मुश्किल हो जाता है। मैं जवाब दूं भी तो क्या? जिस राज्य के निर्माण की लड़ाई के लिए परिवार की चिंता नहीं की आज वह मुझे क्या दे रहा है? मैं अपने आंदोलनकारी होने पर गर्व कैसे महसूस करूं? यह कहना है, 65 वर्षीय आंदोलनकारी पुष्पलता सिरमाडा का।
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चार साल पहले चला पता
चार साल पहले पुलिस अचानक पुष्पलता सिरमाडा को खोजते हुए उनके घर पहुंची और उन पर दर्ज मुकदमे के बारे में बताया। पुष्पलता ने बताया कि मैं उस वक्त हैरान थी कि इतने सालों बाद यह किस तरह का मुकदमा?

बताया गया कि राज्य निर्माण की लड़ाई लड़ने वाले आंदोलनकारियों पर केस दर्ज किया गया था, लेकिन तत्कालीन सरकार द्वारा सभी आंदोलनकारियों से मुकदमा हटाने की घोषणा की गई थी। बावजूद इसके पुष्पलता पर मुकदमा चल रहा है।
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आज भी सुनवाई के लिए जाती हैं पुष्पलता
बताया कि वह हर माह सीजीएम कोर्ट में सुनवाई के लिए जाती हैं। अगली सुनवाई 17 अक्तूबर को है। पुष्पलता का कहना है कि जिस राज्य को आंदोलनकारियों ने बनाया उसी राज्य पर उनका अपमान किया जा रहा है। राज कर रहे नेता भूल गये हैं कि राज्य उन्हें हमने दिलाया है।

मेरी सुनवाई का सिलसिला न जाने कब तक जारी रहेगा, लेकिन यह देखकर बहुत दुख होता है कि जिस राज्य की कल्पना की थी वह क्या से क्या बन गया। आज उसे बनाने में अपना सब कुछ झोंकने वाले भी मुकदमे में पिस रहे हैं।
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