राजपुर रोड पर चार अप्रैल की रात आईजी के सरकारी वाहन सवार दरोगा समेत तीन पुलिसकर्मियों ने आचार संहिता की आड़ में प्रॉपर्टी डीलर अनुरोध पंवार को आतंकित नोटों से भरा बैग लूट लिया था। पीड़ित ने नौ अप्रैल को डालनवाला कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि कांग्रेस नेता अनुपम शर्मा के इशारे पर पुलिसकर्मियों ने यह लूट की है। अधिकारियों ने जांच के बाद आईजी के वाहन का दुरुपयोग करने के आरोप में दरोगा दिनेश नेगी, सिपाही हिमांशु उपाध्याय और मनोज अधिकारी को निलंबित कर दिया था। बाद में विवेचना एसटीएफ को स्थानांतरित कर दी गई थी। एसटीएफ ने जांच के बाद कांग्रेस नेता अनुपम शर्मा, निलंबित दरोगा दिनेश नेगी, सिपाही हिमांशु और मनोज अधिकारी को जेल भेज दिया था।
जमानत पर आरोपी
पुलिस लूटकांड में आरोपी कांग्रेस नेता अनुपम शर्मा, निलंबित दरोगा दिनेश नेगी और दोनों निलंबित सिपाही मनोज अधिकारी और हिमांशु उपाध्याय फिलहाल जमानत पर हैं। सबसे पहले जमानत कांग्रेस अनुपम शर्मा को मिली थी। इसके बाद एक-एक कर तमाम आरोपी जमानत पर बाहर आ गए। सुनवाई के दौरान लूट से जुड़ी रकम का खुलासा और किसी तरह की बरामदगी न होने का लाभ सीधे तौर पर आरोपियों के हक में गया है।
कब क्या हुआ
चार अप्रैल - आईजी की कार सवार पुलिसकर्मियों के प्रॉपर्टी डीलर अनुरोध पंवार से नोटों से भरा बैग लूटा।
सात अप्रैल - प्रॉपर्टी डीलर पंवार ने अधिकारियों से मिलकर लूटपाट का आरोप लगाया।
आठ अप्रैल - एसपी सिटी श्वेता चौबे की अगुवाई में जांच पड़ताल हुई।
नौ अप्रैल - सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस के खिलाफ रिपोर्ट सौंपी।
10 अप्रैल - डालनवाला कोतवाली में कांग्रेस नेता और तीन अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ।
11 अप्रैल - दरोगा दिनेश नेगी, सिपाही हिमांशु उपाध्याय और मनोज अधिकारी को निलंबित किया गया।
12 अप्रैल - आईजी की सिफारिश के बाद विवेचना एसटीएफ के सुपुर्द की गई।
16 अप्रैल - एसटीएफ ने कांग्रेस नेता अनुपम शर्मा और तीनों पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
18 जून - एसटीएफ ने आरोपियों के खिलाफ लूट की धारा में आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया।
अपने मकसद में कामयाब रहे आरोपी
लूटकांड में फंसे आरोपी अपने मकसद में पूरी तरह कामयाब रहे हैं। लूटकांड में पुलिस संलिप्तता के बाद अधिकारियों ने जिस तरह का कड़ा रुख अपनाया था, वह धीरे-धीरे नरम पड़ता चला गया। एसटीएफ विवेचक के सामने बयान दर्ज कराने से पहले आरोपियों ने कानूनी जानकारों से लंबी बातचीत की थी। पूछताछ के दौरान चारों आरोपी एक ही बयान पर अडिग रहे। रिमांड के दौरान भी वे विचलित नहीं हो पाए। आरोप पत्र दाखिल होने के कारण यह साफ हो गया कि आरोपी अपने मकसद में पूरी तरह कामयाब हो गए हैं।