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कॉल सेंटर की आड़ में बेरोजगारों से इस तरह हड़प रहे थे पैसा, तीन लोग गिरफ्तार

Mon, 25 Sep 2017 01:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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एसटीएफ ने कॉल सेंटर की आड़ में नौकरी लगवाने के नाम पर बेरोजगारों से एक करोड़ रुपये से ऊपर की ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। गिरोह के मास्टर माइंड समेत तीन शातिरों को गिरफ्तार कर करीब 50 लाख रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है। गिरोह ने हजारों बेरोजगारों को अपना शिकार बनाया था। अनुमान है कि नौकरी का झांसा देकर एक करोड़ से अधिक की ठगी की है।
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एसटीएफ की एसएसपी रिधिम अग्रवाल ने बताया कि उत्तराखंड में प्राइवेट सेक्टर में नौकरी लगवाने के नाम पर बेरोजगारों से ठगी की सूचनाएं मिली थीं। एसटीएफ ने बेरोजगारों से ठगी करने वाले गिरोह की धरपकड़ के लिए टीम गठित की।

टीम सदस्यों ने पीड़ितों से ठगी करने वालों के मोबाइल नंबर हासिल कर सर्विलांस की मदद से उनकी लोकेशन और जानकारी हासिल की। बेरोजगारों ने नौकरी के नाम पर ठगों के जिन बैंक खातों में कैश जमा करवाया था उनकी भी पड़ताल की।
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जांच में कड़ी से कड़ी जुड़ती गई। इसकी पुष्टि हो गई कि इंद्रपुर से बद्रीपुर रोड पर कुछ लोग दुकान किराए पर लेकर फर्जी कॉल सेंटर चला रहे हैं। एसएसपी के मुताबिक टीम ने रविवार को बद्रीपुर में छापा मारा।
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बेरोजगारों को ऐसे झांसे में लेता था गिरोह

और कॉल सेंटर से तीन लोगों को दबोच लिया। पूछताछ में आरोपियों ने अपने नाम दीपक परिदार निवासी विष्णु पुरम मोथरोवाला, आदेश सिंह निवासी बड़ोवाला शिमला रोड और पंकज कपूर निवासी लेन नंबर 13 ओगल भट्टा क्लेमेंटटाउन बताया। दीपक परिदार गिरोह का सरगना है और मूलरूप से ग्राम बागरो जिला रतनाम मध्य प्रदेश का रहने वाला है।

विगत दो साल से देहरादून में आदेश और पंकज के साथ मिलकर बेरोजगारों को नौकरी दिलाने के नाम पर ठग रहा था। एसएसपी के मुताबिक गिरोह ने हजारों बेरोजगारों को झांसे में फंसाकर करीब एक करोड़ की ठगी की है। पूछताछ में करीब 50 लाख रुपये की ठगी की पुष्टि हो चुकी है।

गिरोह का सरगना दीपक बेहद शातिर है। टाइम्स जॉब डॉट कॉम और मोंस्टर डॉट कॉम पोर्टल में बेरोजगारों के रिज्यूम का डाटा हैक करके निकाल लेता था। फिर उनकी प्रोफाइल देखकर संपर्क करता था। लड़कियों से फोन करवाए जाते थे। बेरोजगारों को नौकरी का झांसा देकर पंजीकरण के नाम पर 1900 रुपये जमा करवाए जाते थे। फिर वेरिफिकेशन के नाम पर 5600 रुपये और एकाउंट खोलने के नाम पर 10 हजार रुपये वसूले जाते थे। बेरोजगारों से नकदी बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर करवाई जाती थी। 

एसटीएफ की टीम में निरीक्षक संदीप नेगी, निरीक्षक विनोद गुसांई, हेड कांस्टेबल वेद प्रकाश भट्ट, कांस्टेबल विरेंद्र नौटियाल, महेंद्र नेगी, आरक्षी मोहन असवाल मौजूद थे। एसएसपी ने टीम को ढाई हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।
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