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सरकारी नहीं तो निजी भूमि पर बनेगा स्टेट वार मेमोरियल

Mon, 27 Jul 2015 01:21 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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शहीदों के सम्मान में बनने वाले स्टेट वार मेमोरियल को लेकर अमर उजाला की मुहिम रंग लाई। वर्षों से भूमि के अभाव में निर्माण से वंचित स्टेट वार मेमोरियल की अड़चन अब दूर हो गई है।
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उत्तराखंड सरकार इसके लिए निजी भूमि खरीदने को तैयार हो गई है। शौर्य दिवस पर इसकी घोषणा मुख्यमंत्री हरीश रावत ने की। भूमि के लिए मुख्यमंत्री ने सैनिक कल्याण मंत्री, सैनिक कल्याण परिषद अध्यक्ष और मुख्य सचिव की एक कमेटी भी गठित कर दी है।

अमर उजाला ने वार मेमोरियल के प्रस्ताव की बरसों से हो रही अनदेखी का मुद्दा उठाया था। सरकार के स्तर से बरसों से मेमोरियल के नाम पर सिर्फ सियासत हो रही थी, जिससे पूर्व सैनिक बेहद क्षुब्ध थे। रविवार को शौर्य दिवस पर गांधी पार्क में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने साफ किया कि निर्माण के लिए सरकार निजी भूमि खरीदेगी।
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सरकारी भूमि नहीं मिलने से निर्माण पर लंबे समय से पेंच फंसा हुआ है। सीएम ने वार मेमोरियल को सैन्य बहुल्य प्रदेश के लिए प्रेरणा और सम्मान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वार मेमोरियल के लिए सैनिक कल्याण मंत्री, राज्य सैनिक कल्याण परिषद के अध्यक्ष व मुख्य सचिव की एक कमेटी भूमि का चयन करेगी। सरकारी भूमि के विकल्प नहीं मिलने पर सरकार इसके लिए भूमि खरीदने को तैयार है।

इससे पूर्व कारगिल शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के संसाधन सीमित हैं, लेकिन सैनिकों के प्रति हमारी भावनाएं असीमित हैं। उत्तराखंड सैनिक कल्याण में अनुकरणीय राज्य के रूप में दिखेगा। शहीदों के सपनों के अनुरूप राष्ट्र, राज्य व गांव का विकास करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

शौर्य दिवस पर पूरा राष्ट्र संकल्प ले रहा है कि वीर सैनिकों की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देंगे। सैनिक कल्याण मंत्री हरक सिंह रावत ने कारगिल शहीदों को नमन करते हुए कहा कि सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों व आश्रितों के लिए खुले दिल से काम कर रही है।

विधायक राजकुमार ने गांधी पार्क को शहीद स्थल के तौर पर विकसित करने के लिए सीएम की पूर्व में घोषणा के बावजूद धीमी रफ्तार से हो रहे कार्यों का मुद्दा उठाया। सैनिक कल्याण परिषद उपाध्यक्ष कैप्टन बलवीर सिंह रावत (रि) सहित बड़ी संख्या में विभिन्न रैंकों के पूर्व सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक शहीद सैनिकों के परिवारजन मौजूद थे।

जनरल नेगी ने रखी वार मेमोरियल की मांग
सैनिक कल्याण परिषद के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल गंभीर सिंह नेगी (रि) ने शौर्य दिवस समारोह में मंच से स्टेट वार मेमोरियल निर्माण का मुद्दा रखा। उन्होंने कहा कि राज्य में कई जगह शहीदों की याद में स्मारक बने हैं, लेकिन एक स्टेट वार मेमोरियल होना चाहिए जिसमें प्रथम विश्व युद्ध से लेकर आज तक हुए युद्धों के शहीदों की वीरगाथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा दे।

शहीद सैनिकों के बच्चों की उच्च शिक्षा में मिलेगी मदद
शौर्य दिवस पर प्रदेश सरकार ने शहीद सैनिकों और युद्ध अपंग पूर्व सैनिकों के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे बच्चों के लिए बड़ा तोहफा दिया है। शहीद सैनिकों के आईआईटी, आईआईएम और एमबीबीएस में प्रवेश लेने वाले या अध्ययनरत बच्चों को वार्षिक एक लाख रुपये की आर्थिक मदद उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम (उपनल) देगा।

इसके अलावा शहीद सैनिकों और युद्ध अपंग पूर्व सैनिकों के बच्चों को सैनिक कल्याण निदेशालय से उच्च शिक्षा के अन्य कोर्सों लिए धनराशि मिलती है, उतनी राशि उपनल भी देगा। गांधी पार्क में आयोजित शौर्य दिवस कार्यक्रम में सैनिक कल्याण मंत्री हरक सिंह ने कहा कि सरकार शहीद सैनिकों, सैनिकों और पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए प्रयासरत है।

अन्य राज्यों के मुकाबले उत्तराखंड सर्वाधिक अनुदान देता है। अलंकृत सैनिकों को एकमुश्त और वार्षिक अनुदान सर्वाधिक हमारे राज्य में है। शहीद सैनिकों के आश्रितों का ख्याल रखना सरकार का दायित्व है, जिसके तहत अब उपनल से छात्रवृति का प्रावधान किया जा रहा है।

आईआईटी, एमबीबीएस और आईआईएम में प्रवेश लेने वाले शहीद सैनिकों और अपंग सैनिकों के बच्चों को एक लाख रुपये की मदद उपनल देंगे। उन्होंने कहा कि सैनिक कल्याण विभाग उच्च शिक्षा के लिए जो धनराशि पूर्व सैनिकों के बच्चों को दे रहा है उतनी राशि उपनल भी देगा।

पीएचडी तथा एमफिल के लिए दो छात्रों को 12 हजार की जगह अब 24 हजार रुपए मिलेंगे। बीएससी, बीडीएस, बीबीए के लिए 3200 की जगह 6400 रुपए मिलेंगे। बीटेक और एमटेक के लिए 10400 रुपए मिलेंगे।

मुफ्त छात्रावास की सुविधा मिलेगी शहरों में
सैनिक कल्याण मंत्री ने उपनल के माध्यम से देहरादून, श्रीनगर, हल्द्वानी, अल्मोड़ा, नैनीताल जैसे शहरों में छात्रावास बनाने का फैसला लिया है। यह छात्रावास इस शहर में पढ़ने वाले शहीद सैनिकों केबच्चों के लिए निशुल्क होंगे जबकि सैनिकों और पूर्व सैनिकों के बच्चों के लिए न्यूनतम दरों पर रहने की सुविधा मिलेगी।
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