उत्तराखंड के राज्य सूचना आयुक्त अनिल शर्मा को पद नहीं छोड़ने पर तेजाब फेंककर जलाने की धमकी भरा पत्र मिला है।
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मंगलवार देर शाम सूचना आयुक्त दफ्तर पहुंचे पत्र से सनसनी फैल गई। शर्मा ने एसएसपी को शिकायत के साथ पत्र भी सौंपा है। एसएसपी ने रायपुर थाना पुलिस को मामले की गंभीरता से छानबीन के निर्देश दिए हैं।
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पुलिस अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
सूचना आयुक्त को मिला धमकी भरा पत्र
सूचना आयुक्त को मिले धमकी भरे पत्र में उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई है। पत्र में दवाओं की खरीद-फरोख्त संबंधित मामले की सुनवाई से हटने का इशारा किया गया है।
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लिखा है कि वह इससे पहले भी उन्हें आगाह कर चुका है। इस बार मामले में दखल दिया तो परिणाम खतरनाक होंगे। सूचना आयुक्त ने शाम को ही एसएसपी को आयोग दफ्तर में धमकी भरा पत्र और अन्य दस्तावेज सौंपे हैं।
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मुझे पहले भी धमकी मिलती रही है लेकिन इस बार धमकी देने वाले के मंसूबे खतरनाक दिख रहे हैं। धमकी देने वाला जिस मामले से हटने के लिए कह रहा है, उसकी सीबीआई जांच की संस्तुति कर चुका हूं। - अनिल शर्मा, राज्य सूचना आयुक्त
पहले हल्के में लिया तो मिली एक और धमकी
राज्य सूचना आयुक्त अनिल शर्मा को एक बार फिर जान से मारने की धमकी मिली। रुड़की दवा घोटाले में सूचना आयुक्त द्वारा सीबीआई जांच की सिफारिश किए जाने के बाद इस तरह की चीजें सामने आने लगी थी।
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दो वर्ष पहले भी एक धमकी भरी चिट्ठी मिली थी, मुकदमा भी कायम हुआ लेकिन नतीजा शून्य ही रहा। मामला संवेदनशील होने पर भी शर्मा के आवास से सुरक्षा गार्द हटा ली।
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जबकि दिल्ली पुलिस ने उनके दिल्ली आवास पर पूरी सुरक्षा दी हुई है लेकिन राज्य में कटौती करने के नाम पर हटा ली गई।
दो साल पहले भी मिली थी धमकी भरी चिट्ठी
एनआरएचएम दवा घोटाले में राज्य सूचना आयुक्त अनिल शर्मा के सीबीआई जांच की सिफारिश करने के बाद परिस्थितियों में खतरे का आभास हो रहा था।
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दो साल पहले मिली धमकी भरी चिट्ठी के बाद मुकदमा कायम तो हुआ लेकिन उसकी फाइनल रिपोर्ट क्या लगाई इसकी किसी को खबर नहीं। पुलिस ने उन्हें पहले मुकदमे के नतीजे के बारे में अभी तक कुछ नहीं बताया। इसी बीच उनकी सुरक्षा भी कम कर दी गई।
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ऑफिसर्स ट्रांजिट हॉस्टल में आवास से सुरक्षा गार्द व वॉचर भी हटा लिए गए। अब सिर्फ एक पीएसओ (पर्सनल सिक्युरिटी ऑफिसर) ही साथ में रहता है। आज की चिट्ठी का मजमून दिल दहला देने वाला है।
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उसमें तेजाब डालने के साथ ही तड़फा तड़फा कर मारने की धमकी दी गई है। यह भी कहा है कि आपके साथ कोई नहीं आएगा, सब हमारे आदमी है। मुख्य सूचना आयुक्त को लेकर भी लिखा है कि वह भी आपके (शर्मा) के साथ नहीं होंगे।
रुड़की ड्रग वेयरहाउस में 22 लाख रुपए की एक्सपायर दवाएं मिलने के मामले में पांच वर्ष तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। तीन जांच रिपोट आई लेकिन दोषी चिन्हित किए गए।
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सूचना आयोग के निर्देश पर साढ़े ग्यारह करोड़ कुल दवा खरीद की चौथी जांच महानिदेशालय स्तर से शुरू हुई लेकिन उसमें जांच कमेटी ने हाथ खड़े कर दिए।
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अब जब सूचना आयोग ने सीबीआई जांच की सिफारिश से विभाग में खलबली मची हुई है। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ओम प्रकाश ने तो फैसले के समय कहा था कि सीबीआई जांच कराई जाएगी लेकिन बाद में आगे कार्यवाही नहीं हुई।