- राज्य सूचना आयुक्त योगेश भट्ट का कार्यकाल पूरा
- लापरवाह अधिकारियों पर ठोका 11.81 लाख का जुर्माना
माई सिटी रिपोर्टर
देहरादून। राज्य सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने तीन वर्ष के कार्यकाल के बाद शुक्रवार को विदाई ली। उनका कार्यकाल केवल अपीलों के निस्तारण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने सरकारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार और लापरवाही पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने लापरवाह अधिकारियों को आरटीआई का सबक सिखाने के लिए कुल 11.81 लाख रुपये जुर्माना ठोका। कार्यकाल के दौरान शत-प्रतिशत निस्तारण का रिकॉर्ड बनाते हुए सभी 1480 अपीलों व शिकायतों का समाधान किया।
-
आरटीआई से होते रहे बड़े खुलासे
राज्य सूचना आयुक्त भट्ट के कार्यकाल में कई ऐसे मामले उजागर हुए, जिसमें संबंधित विभागों से लेकर शासन स्तर तक अहम निर्देश जारी हुए। इनमें कई मामले अमर उजाला ने सबसे पहले प्रमुखता से प्रकाशित किए, जिनमें श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में भारी धांधली और दोषी शिक्षकों को 10 साल के लिए ब्लैकलिस्ट करना। बिना मान्यता चल रहे कॉलेजों पर भी कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करवाई। समाज कल्याण विभाग को आदेश जारी करके स्पष्ट करना पड़ा कि पेंशनर के जीवनकाल की राशि उसके नॉमिनी को ही मिलेगी, उसे जब्त नहीं किया जाएगा। पिथौरागढ़ के एक निशानेबाज को सम्मान दिलाया। राजाजी टाइगर रिजर्व से सटे क्षेत्र में निर्माण के लिए एनओसी देने में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया। इसके अलावा कृषि योजना के लिए दो बार बजट जारी होना, देहरादून नगर निगम में पिछले 33 सालों में 13743 फाइलों के गुम होने का खुलासा, पीआरडी भर्ती में फर्जी प्रमाणपत्र का खेल, खाद्य विभाग घोटाला, ऐसे तमाम मामले हैं, जिनमें राज्य सूचना आयुक्त के सवालों और नोटिस के बाद पीड़ित पक्ष को न्याय मिला। कार्यकाल के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियां आरटीआई के दायरे में हैं। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण से लाभ लेने वाले निजी अस्पतालों को सूचना देने के लिए बाध्य किया।