चुनावी साल में कर्मचारियों के सबसे बड़े धड़े को भी उकसाने से उत्तराखंड सरकार परहेज नहीं कर रही है।
वेतन विसंगति सहित अन्य मामलों में चार माह में भी कोई फैसला न होने से नाराज कर्मचारियों ने शनिवार को 29 फरवरी तक का अल्टीमेटम दिया और एक मार्च से राजस्व मंत्री यशपाल आर्य के यमुना कॉलोनी आवास के सामने भूख हड़ताल पर बैठने का एलान किया।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का यह अहम फैसला उन दो लाख राज्य कर्मचारियों की चेतावनी है, जिन्हें मुख्यमंत्री हरीश रावत अभी तक धीरज रखने की सलाह देते आए हैं।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के 27 सूत्रीय मांग पत्र पर मुख्यमंत्री हरीश रावत के निर्देश पर राजस्व मंत्री यशपाल आर्य की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया था। समिति की दो बैठक भी हुईं। आखिरी बार समिति की बैठक करीब चार माह पूर्व हुई थी। लेकिन अब तक समिति की बैठक का कार्यवृत्त जारी नहीं किया गया।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष प्रहलाद सिंह का कहना है कि कर्मचारियों को यह पता ही नहीं चल पा रहा है कि उनके 27 सूत्रीय मांग पत्र पर क्या कार्रवाई हो रही है। चार माह के इंतजार के बाद भी तमाम मामले अधर में लटके हुए हैं।
प्रदेश सरकार की लेटलतीफी से नाराज राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की शनिवार को हुई हाई पावर कमेटी की बैठक में सरकार को 29 फरवरी तक का अल्टीमेटम दिया गया। प्रवक्ता अरुण पांडे ने बताया कि अगर 27 सूत्रीय मांग पत्र पर कार्रवाई नहीं होती है तो एक मार्च को राजस्व मंत्री यशपाल आर्य के यमुना कालोनी स्थित आवास पर कर्मचारी भूख हड़ताल करेंगे।
इस पर भी बात न बनी तो इसी दिन आंदोलन का एलान कर दिया जाएगा। परिषद के महामंत्री प्रदीप कोहली मानते हैं कि उनकी मांगों पर सरकार का रवैया नकारात्मक है। एक कार्यवृत्त को जारी करने में इतना समय लग रहा है तो फैसलों को लागू करने में कितना समय लगेगा। समिति की बैठक का कार्यवृत्त वित्त विभाग ने तैयार कर राजस्व मंत्री को भेज दिया था, लेकिन अभी तक मंत्री का इस पर अनुमोदन नहीं मिला है।
कई सारे मामलों में निर्णय लेकर शासन को अवगत करा दिया गया था। मुख्यमंत्री का इनमें अनुमोदन लिया जाना है। आपने याद दिला दिया है। सोमवार को अधिकारियों से बात की जाएगी। अध्यक्ष से भी मैं बात करूंगा।
- हीरा सिंह बिष्ट, सदस्य, कर्मचारी मांगों की निस्तारण समिति