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वन्य जीव बोर्ड की बैठक में छाया रहा खनन

Sun, 07 Feb 2016 10:00 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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खनन के मामले में एनजीटी की सख्ती के माहौल में उत्तराखंड राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक के प्रस्तावों में सबसे अधिक मसले खनन (चुगान) के रहे।
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संरक्षित क्षेत्रों के 10 किमी दायरे के अंदर 13 खनन के मामलों को बोर्ड ने सशर्त अनुमति दे दी। कार्बेट पार्क में एक साथ बाघ और टाइगर सफारी बनाए जाने की अनुमति मिल गई। बोर्ड के अध्यक्ष मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि कार्बेट के पास, हरिद्वार में सफारी बनेंगे। अल्मोड़ा के लेपर्ड सफारी को और विकसित किया जाएगा।

वन्य जीव बोर्ड की बैठक में राजाजी नेशनल पार्क के 10 किमी के दायरे में आने वाले सुमननगर, बिशननगर, अजीतपुर तहसील हरिद्वार, मिसरवाला खुर्द, मारखम ग्रांट, माजरी ग्रांट, अजीतपुर तहसील देहरादून के अलावा पांच अन्य क्षेत्रों में सशर्त खनन की अनुमति दी गई है। बोर्ड की बैठक में आसन कंजर्वेशन रिजर्व के 10 किमी में आने वाले ग्राम नवाबगढ़ को विचारार्थ रखा गया है। यहां का मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
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केदारनाथ वन्य जीव विहार के 10 किमी दायरे में आने वाले रुद्रप्रयाग के दो मामलों में बोर्ड ने सशर्त अनुमति दे दी। बैठक में कहा गया कि पर्वतारोहण के लिए अनुमति की अवधि को 1 अप्रैल से 30 नवंबर तक किये जाएगा। इको टूरिज्म के विकास के लिए युवकों को नेचर गाइड के प्रशिक्षण का मशविरा दिया गया। दिया जायेगा, राष्ट्रीय पार्कों में कांवड़, कुंभ मेला आदि धार्मिक पर्वों पर भंडारा लगाने और पकाने पर रोक लगा दी गई।

राजाजी पार्क से प्राप्त होने वाली आय का 100 प्रतिशत भाग राजाजी टाइगर रिजर्व कंजर्वेशन फाउंडेशन के फंड में जमा करने, गुलदारों के पुनर्वास हेतु गुलदार सफारी की स्थापना, कार्बेट में स्पेशल टाइगर फोर्स की स्थापना, कार्बेट टाइगर रिजर्व में प्रवेश शुल्क से प्राप्त आय का 50 प्रतिशत कार्बेट टाइगर फाउंडेशन में दिए जाने पर सहमति बनी। जंगली जानवरों के संरक्षण के लिये टीम बनेगी।

स्नो लैपर्ड, कस्तूरी मृग, चमोली के द्रोणगिरी में चौरगाय को संरक्षण की आवश्यकता बताई गई। नए वेटेरीनरी डाक्टरों की भर्ती होने तक सेवा निवृत्त डाक्टरों की मदद लेने के लिए कहा गया। जानवरों के लिये पानी उपलब्ध हो इसके लिए सिंचाई व पेयजल विभाग पानी संरक्षण की योजनाएं बनाएंगे। चीड़ के जंगलों को नियंत्रित करने की जरूरत है।
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फूलों की घाटी, नन्दादेवी व गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान में जलवायु अनुश्रवण संयंत्रों को स्थापित किया जा रहा है। राज्य में 68 बुग्याल ऐसे हैं जो औली से भी बड़े हैं, उन्हें विकसित करने की जरूरत है। हाथियों के स्वतंत्र विचरण के लिए मैपिंग करवा कर गलियारों के निर्माण करवाने की जरूरत है।
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