महज दस साल की एक बेटी ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्टेट चैंपियन बनकर अपने पिता व गांव का नाम रौशन किया है।
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यह कारनामा कर दिखाया है चकराता के दुर्गम गांव बंगार में खेतीबाड़ी कर जीवन गुजर बसर करने वाले किसान सबल सिंह चौहान की बेटी मानसी चौहान ने। हरिद्वार स्थित गुरुकुल कांगड़ी में 13-16 नवंबर के बीच हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में इस खिलाड़ी की प्रतिभा देख हर कोई दांतों तले अंगुलियां दबाने पर मजबूर हो गया।
अपने हुनर का लोहा मनवाया
मानसी महर्षि अरविंद घोष इंटर कॉलेज डाकपत्थर में कक्षा पांचवीं की छात्रा है। उसने 50 मीटर, 100 मीटर दौड़ हो या फिर लंबी कूद सभी प्रतियोगिताओं में अपने हुनर का लोहा मनवाया है। इन प्रतियोगिताओं में मानसी स्टेट चैंपियन बनी है।
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भले ही मानसी का परिवार आर्थिक तौर पर मजबूत न हो लेकिन इस बच्ची के इरादे कितने मजबूत हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसका सपना एथलीट बन ओलंपिक और कामनवेल्थ गेम में देश का प्रतिनिधित्व करने की है।
खास बात यह है कि मानसी ने स्टेट चैंपियन का यह खिताब बड़े-बड़े ग्राउंड में महंगे पीटी शूज पहन प्रैक्टिस कर हासिल नहीं किया, बल्कि स्कूल के ही महज 50 मीटर के ट्रैक पर नंगे पैर दौड़कर हासिल किया है।
पहले भी कर चुकी नाम रोशन
सबल सिंह चौहान की ये बिटिया इससे पहले भी संकुल, ब्लॉक, जिला स्तरीय प्रतियोगिता में नाम रोशन कर चुकी है। तीन भाई बहनों में सबसे छोटी मानसी अपनी मां के साथ डाकपत्थर स्थित शिवपुरी में किराए के मकान पर रहकर पढ़ाई कर रही है।
वह अपनी कामयाबी का श्रेय अपने स्पोर्ट्स टीचर कुंवर सिंह को देती है। मानसी के पिता का कहना है कि भले ही वह पढ़ लिख न पाए हों, लेकिन वह अपने सभी बच्चों को पढ़ा लिखा देखना चाहते हैं। इसके लिए वे मेहनत भी कर रहे हैं।
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