ये उल्कापात आकाश में ओरियन कांस्टिलेशन की दिशा से आता प्रतीत होता है, जिस कारण इसका नाम ओरियोनिड मीटियर शॉवर पड़ा है। ओरियोनिड 21 अक्टूबर की रात पूर्व दिशा में नजर आएगा, जबकि हल्की चमक के साथ चंद्रमा दक्षिण में होगा, ऐसे में यह उल्कापात आतिशी नजारा प्रस्तुत करेगा। 21 की देर रात एवं 22 की सुबह लगभग 25 उल्कापात प्रति घंटे की दर से होगा।
इस उल्कापात की विशेषता यह है कि इसमें उल्काएं बहुत तेज गति से वायुमंडल में प्रवेश करती हैं जो 66 किमी प्रति सेकेंड तक होती है। इस कारण घर्षण से जलने के बाद इनके पीछे धुएं की एक रेखा नजर आती है जो इसे और भी आकर्षक बना देती है।
आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान एरीज के पूर्व निदेशक डॉ. अनिल पांडे के अनुसार तीव्र गति के कारण ये उल्कापात पलक झपकने तक के अंतराल में ही आंखों से ओझल हो जाता है।