-प्रदेश में आईपीएचएस मानक लागू होने से 30 प्रतिशत कम हो गए फार्मासिस्ट के पद
-उत्तराखंड ने भारतीय फार्मेसी काउंसिल की बैठक में रखी मांग
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। भारतीय फार्मेसी काउंसिल की बैठक में उत्तराखंड ने प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में फार्मासिस्टों के दो पदों के मानक बनाने की मांग रखी। उत्तराखंड फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार केएस फरस्वाण ने कहा प्रदेश में आईपीएचएस मानकों के लागू होने से फार्मासिस्टों के 30 प्रतिशत कम हो गए।
नई दिल्ली में हुई बैठक में फरस्वाण ने उत्तराखंड के मुद्दों को उठाया। उन्होंने कहा कि फार्मेसी सेवाओं को जनोपयोगी बनाने के लिए प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक फार्मासिस्ट के पद का प्रावधान बनाने व बड़े चिकित्सालयों में प्रत्येक 50 ओपीडी रोगियों की संख्या पर एक फार्मासिस्ट के पद का मानक बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कई शिक्षण संस्थान डिप्लोमा इन फार्मेसी व बीफार्मा में ऐसे छात्रों को प्रवेश दे देते हैं, जिन्होंने इंटरमीडिएट परीक्षा में एक अनिवार्य विषय को उत्तीर्ण न किया हो, इस कारण फार्मेसी प्रशिक्षण पूरा करने के बाद भी उनका फार्मेसिस्ट के रूप में पंजीकरण नहीं हो पाता है और ऐसे छात्रों का भविष्य खराब हो जाता है। उन्होंने ऐसे मामलों में भारतीय फार्मेसी काउंसिल से सख्ती बरतने का आग्रह किया। इसके अलावा बीफार्मा की परीक्षा नीट या जेईई से करवाने का सुझाव दिया।
उत्तराखंड डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष सुधा कुकरेती व महामंत्री सतीश चंद्र पांडेय ने फार्मासिस्टों की मांग को काउंसिल के समक्ष उठाने का उत्तराखं फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार का आभार व्यक्त किया।