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जब दस रुपए का स्टांप 50 में खरीदना पड़ा

Tue, 01 Oct 2013 11:22 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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राजधानी दून के कोर्ट परिसर में सोमवार को 10 रुपए वाले स्टांप पेपर के लिए मारामारी रही। सैकड़ों की संख्या में कोर्ट पहुंचे लोग घंटों स्टांप के लिए लाइन में खड़े रहे। इसके बावजूद उन्हें निराश होना पड़ा। लोगों की मानें तो दस रुपए के स्टांप की जमकर कालाबाजारी की गई। लोगों से चार से पांच गुना तक कीमत वसूली गई।
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स्टांप पेपर के लिए भीड़
खाद्य सुरक्षा योजना में आय प्रमाणपत्र के लिए आवेदक से दस रुपए के स्टांप पर शपथ पत्र मांगे जा रहे हैं। सोमवार को आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि होने से कोर्ट परिसर में सुबह से ही स्टांप पेपर के लिए भीड़ लग गई, लेकिन माह का अंतिम दिन होने से स्टांप वेंडरों को ट्रेजरी से स्टांप नहीं मिल सके। कुछ ही स्टांप वेंडरों के पास दस रुपए के स्टांप थे। ऐसे में उन्होंने इसका भरपूर फायदा उठाया। दस रुपए के स्टांप के लिए मनमानी कीमत वसूली गई। इसे लेकर कई लोगों से स्टांप वेंडरों की नोकझोंक भी हुई।

पांव रखने तक की नहीं थी जगह  
कोर्ट परिसर में एडीएम दफ्तर के बाहर स्टांप के लिए लंबी लाइन लगी थी। वहीं शहीद स्थल के आसपास भी मारामारी थी। बड़ी संख्या में स्टांप के लिए लोगों के पहुंचने से कोर्ट परिसर में पूरे दिन पांव रखने तक की जगह नहीं थी।
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‘50 रुपए में खरीदा स्टांप’
रेसकोर्स निवासी मीना थापा ने बताया कि दस रुपए का स्टांप उन्होंने पचास रुपए में खरीदा। त्यागी रोड निवासी प्रवीन ने बताया कि परिसर में स्टांप के लिए स्टाप वेंडर हर किसी से मनमाने रेट वसूल रहे हैं।

घंटों खड़े रहे फिर भी नहीं मिले स्टांप
कोर्ट परिसर में कई लोगों को घंटों खड़े रहने के बावजूद स्टांप नहीं मिले। किशनपुर राजपुर रोड निवासी चंद्रकांता बताती हैं कि कोर्ट में कहीं भी दस रुपए का स्टांप नहीं मिला। डिफेंस कालोनी निवासी अनीता, लक्ष्मण चौक की नीतू शर्मा और कारगी ग्रांट के मोहम्मद शमशाद भी घंटों स्टांप के लिए लाइन में खड़े रहे। बाद में उन्हें निराश लौटना पड़ा।  

वकील भी हुए नाराज
स्टांप नहीं मिलने से वकील भी नाराज दिखे। वकीलों ने इसके लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। वरिष्ठ वकील नरेश मित्तल बताते हैं कि जनता को हो रही असुविधा को देखते हुए प्रशासन को ट्रेजरी में छह काउंटर खोलने चाहिए थे। वकील सुयश कुकरेती ने कहा कि स्टांप न मिलने से अधिवक्ताओं को भी पिछले काफी समय से परेशानी उठानी पड़ रही है।

शपथ पत्र की बाध्यता खत्म
खाद्य सुरक्षा बिल के तहत एपीएल परिवारों को नया राशन कार्ड बनाने के लिए हो रहे चिह्नीकरण के लिए शपथ पत्र की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है। जिससे लोगों को अब चिह्नीकरण प्रक्रिया के लिए स्टाम्प वेंडरों के पीछे नहीं भागना पड़ेगा।

खाद्य सुरक्षा बिल के तहत फार्म में आय प्रमाण पत्र के स्थान पर शपथ पत्र लगाए जाने की बाध्यता के कारण ब्लैक माकेर्टिंग भी बढ़ गई थी। कचहरी में शपथ पत्रों के लिए मारामारी मची थी और वहीं कई लोगों ने अपनी अलग दुकान खोल ली थी। सोमवार को अमर उजाला ने राशन कार्ड के नाम पर हो रही वसूली नाम शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।

सोमवार को राजपुर रोड विधायक राजकुमार, दून बार एसोसिएशन और उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच ने  जिलाधिकारी से वार्ता कर शपथ पत्र बनाने के लिए महंगे दाम पर स्टांप पेपर बिकने की शिकायत की थी। इसके बाद जिलाधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने आवेदन की अंतिम तिथि सात अक्तूबर तक बढ़ाए जाने के साथ ही शपथ पत्र की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया। कोर्ट परिसर में इसके लिए मुनादी भी कराई गई। डीएम से अलग-अलग मिले प्रतिनिधिमंडल में बार एसोसिएशन के सचिव रघुवीर सिंह कठैत, मंच के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुकरेती आदि शामिल थे।

एक सप्ताह के लिए बढ़ाई गई तिथि
खाद्य सुरक्षा बिल के तहत फार्म जमा करने की अंतिम तिथि को एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है। पहले 30 सितंबर को फार्म जमा करने की अंतिम तिथि तय की गई थी। मगर शहर के ही कई इलाकों में फार्म नहीं बंट सके हैं। ग्रामीण इलाकों में योजना शुरू नहीं हो सकी है। इस कारण सोमवार को भी लोग फार्म के लिए डीएसओ ऑफिस पहुंचे। मगर यहां से उन्हें फार्म नहीं मिल सके। लगातार शिकायतों के बाद जिलाधिकारी ने योजना के तहत फार्म जमा करने की तिथि एक सप्ताह के लिए बढ़ाने के आदेश दिए है।
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