लंबी सुस्ती के बाद अब टीएचडीसी में हिस्सेदारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही जंग एक दिलचस्प मोड़ पर आती दिख रही है। उत्तराखंड की पहल पर सर्वोच्च अदालत ने इस वाद की सुनवाई में तेजी को लेकर राज्य सरकार की अपील को स्वीकार किया और बुधवार को वाद के बिंदू भी तय कर दिए। इससे उत्तराखंड सरकार की उम्मीदों को पंख लग गए हैं।
टीएचडीसी में हिस्सेदारी की पैरवी करने वाले आधिकारिक सूत्रों का मानना है कि चूंकि यूपी का दावा कमजोर है, इसलिए वह इस वाद को लंबा खींचना चाहता है, लेकिन अब वह इस मामले को बहुत ज्यादा समय तक नहीं खींच पाएगा।
ऊर्जा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम के मुताबिक, वाद के बिंदू तय हो जाने के बाद अब कोर्ट सिलसिलेवार आगे की प्रक्रिया करेगी। इसमें गवाही होंगी। क्रास एग्जामिनेशन होगा और फिर बहस होगी। उसके बाद फैसला आएगा। इसमें दोनों राज्यों के ऊर्जा सचिवों की गवाही होनी है। साथ ही टीएचडीसी के व अन्य गवाह प्रस्तुत होने हैं। इस प्रक्रिया में करीब 12 हफ्तों का समय लग सकता है। इस बात की संभावना है कि गवाही नवंबर में शुरू हो जाएगी।
टीएचडीसी की हिस्सेदारी की जंग को सुप्रीम कोर्ट में मजबूती के साथ लड़ने के लिए राज्य सरकार ने देश के ख्यातिलब्ध अधिवक्ता मुकुल रोहतगी को नियुक्त किया था, लेकिन रोहतगी के केंद्र सरकार में दोबारा अटार्नी जनरल बनने की संभावना है। इसलिए उन्होंने किसी एक राज्य का अधिवक्ता बनने से इनकार कर दिया है। ऊर्जा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम के मुताबिक, नामी वकील मुकुल रोहतगी के साथ अधिवक्ताओं की जो टीम तैनात की गई है, वह इस वाद को आगे लड़ेगी और गवाही और क्रास एग्जामिनेशन के समय आवश्यकता के अनुसार, अनुभवी अधिवक्ता की सेवाएं ली जाएंगी।