तेजी से घट रहे भूगर्भ जल को सहेजने के लिए शासन ने सख्ती से कानून लागू कर दिया है।
अगर बोरिंग करके या नलकूप से कोई भूगर्भ जल की फिजूलखर्ची करेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और जेल जाएगा। इसके साथ ही शासन ने अब ग्रुप हाउंसिंग में वर्षा जल संचयन सिस्टम बनाना अनिवार्य कर दिया है। डीएम खुद जाकर सत्यापन करेंगे। शासनादेश का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई तय है।
भूगर्भ जलस्रोतों के घटने से पेयजल विभाग की साढ़े तीन सौ परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इससे प्रदेश के कई जिलों में पीने के पानी की दिक्कत हो गई। भूगर्भ जल की फिजूलखर्ची और बर्बादी रोकने के लिए शासन कई बार चेतावनी भी जारी कर चुका है, लेकिन स्थिति न सुधरने पर अब जल नीति के तहत इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया।
मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह की ओर से जारी शासनादेश में सिंचाई विभाग को निर्देश दिए गए कि दोषी व्यक्ति के खिलाफ अधिनियम के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करें। भूजल के अपव्यय पर बोरिंग और नलकूप बंद कर दिया जाएगा। इसके साथ ही बोरिंग कराने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
इसके साथ ही शासन ने व्यक्तिगत निर्माण और ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट में वर्षा जल संचयन सिस्टम बनाना अनिवार्य कर दिया है। शासन इस संबंध में कई बार निर्देश दे चुका है, लेकिन अब इस बिंदु को भी जल नीति में शामिल कर लिया गया है। किसी भी हाउसिंग प्रोजेक्ट का नक्शा बिना वर्षा जल संचयन सिस्टम के पास नहीं होगा।
ग्रुप हाउसिंग में वर्षा जल संचयन सिस्टम की जिम्मेदारी डीएम को दे दी गई है। शासनादेश में कहा गया है कि ग्रुप हाउसिंग मामलों में जिलाधिकारियों से जांच कराई जाएगी। शासनादेश का उल्लंघन पाए जाने पर डेवलपर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आवासीय प्रोजेक्ट में वर्षा जल संचयन अनिवार्य किए जाने के मामले में केंद्र ने भी प्रदेश शासन को दिशा-निर्देश जारी किया है। सचिव पेयजल अरविंद सिंह ह्यांकी ने बताया कि शासनादेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।