कांग्रेस में सियासी भूचाल लाने के अहम किरदार हरक सिंह रावत भले अपने मंसूबों में पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाए, लेकिन अब भाजपा के खेमे में आकर वह हरीश रावत को चित्त करने की ताल ठोक रहे हैं।
18 मार्च को सदन में साथी विधायक मंत्री प्रसाद मैथानी पर हाथ छोड़ने फिर नौ विधायकों के साथ कांग्रेस से अलग होकर कांग्रेस की सत्ता पलटने की कोशिश के कारण देश भर में चर्चा में आए हरक, सियासी बाजी पलटने के लिए राज्यपाल को जिम्मेदार मानते हैं।
उनका मानना है कि राज्यपाल ने शक्ति परीक्षण के लिए इतना लंबा समय न दिया होता तो हालात दूसरे होते। हरक भाजपा में अपनी घर वापसी से दूसरी पंक्ति के नेता बनने को राजनीतिक चूक नहीं मानते। कांग्रेस छोड़ने के बाद हरीश रावत की आंखों की किरकिरी बने हरक, सीएम रावत के बाजी जीतने के बाद भी हार मानने को तैयार नहीं है।
बकौल हरक सीएम रावत राजनीतिक मर्यादा की हदें लांघ कर उन्हें और उनके करीबियों की चाहे जितनी घेराबंदी कर लें, वह हर वार का पलटवार करेंगे। जैनी प्रकरण से लेकर कई महिला मित्रों से उनके नाम जुड़ने के विवादों पर हरक ने बड़ी सफाई से विरोधियों की सियासी साजिश बता कर खुद को पाक साफ साबित करने की कोशिश की।
प्रदेश की सत्ता में हनक रखने वाले हरक सिंह रावत ने दो माह चले सियासी संकट के उस दौर में कांग्रेस को दोफाड़ करने से लेकर स्टिंग प्रकरण और भाजपा में अपने भविष्य को अमर उजाला संवाददाता अरुणेश पठानिया से बड़ी बेबाकी से साझा किया। वह सब हम अब आप से साझा कर रहे हैं...
प्रश्न - आपके भाजपा में आने पर पोस्टर लगे थे, ‘आ गया हरक, पड़ गया फर्क’, लेकिन अमित शाह की रैली में तो आप दूसरी पंक्ति में थे?
हरक - मुझे प्रदेश कोर कमेटी के 11 लोगों में शामिल किया है । हम उनकी सभी रणनीतियों का हिस्सा रहे। हमारा उपयोग किया जा रहा है। 9 से 20 तक अगस्त मुझे पर्दाफाश कार्यक्रम की जिम्मेदारी दी गई है। प्रदेश के प्रमुख सात आठ भाजपा नेताओं बहुगुणा जी, खंडूड़ी जी, निशंक जी सभी के साथ मुझे शामिल किया गया है। 18 मार्च से पहले भाजपा की जो स्थिति थी वह देख लो और अब उसका सर्वे करवा लो आपको फर्क ही नहीं, बड़ा परिवर्तन दिखाई देगा। मैं लो प्रोफाइल नहीं हुआ हूं।
प्रश्न - 18 मार्च को सदन में जो आपने किया, उससे क्या आपको ऐसा लग रहा था कि आप हरीश रावत का तख्ता पलट कर मुख्यमंत्री बन जाएंगे?
हरक - मैंने यह फैसला सीएम बनने के लिए नहीं लिया था। कांग्रेस में जिस तरह हमारी अनदेखी हो रही थी। मुझे और विजय बहुगुणा को कोर कमेटी से बाहर किया गया। न तो हरीश रावत और न ही दिल्ली वाले हमारी सुन रहे थे। ऐसे में हमें लगा कि कांग्रेस को हमारी जरूरत नहीं है। हमने पूरी प्लानिंग की थी जो काफी हद तक कामयाब रही। सदन में उस दिन विनियोग विधेयक पर साबित कर दिया कि हरीश रावत की सरकार अल्पमत में है।
प्रश्न - आप कहते रहिए अल्पमत में, सरकार तो अब भी हरीश रावत की है ?
हरक - देखिये, हमारा सोचना यह था कि विधानसभा अध्यक्ष काले को सफेद और सफेद को काला तो बता नहीं देंगे। कुंजवाल को कुछ तो शर्म-लिहाज होगी। सदन में 67 में से 35 विधायक हमारे साथ थे। सही मायने में सरकार तो गिर गई थी, लेकिन हरीश और विधानसभा अध्यक्ष ने साजिश कर विधेयक को पास किया। बेसिकली हमसे चूक नहीं हुई। हमको लग रहा था कि गोविंद कुंजवाल इतना तो गलत नहीं करेगें। दूसरा, राज्यपाल को वीडियो रिकार्र्डिंग देख कर निर्णय लेना चाहिए था। खैर उन्होंने जो 28 मार्च तक का समय सरकार को दिया उसमें धांधली से अध्यक्ष ने विनियोग विधेयक को पास मान लिया और हमारा निष्कासन कर दिया। इतना समय नहीं दिया जाना चाहिए था। यहां जिनको संविधान की रक्षा करनी चाहिए थी उनके स्तर से चूक हो गई। गोविंद कुंजवाल की दया और दस दिनों के कारण यह सरकार बची। चुनाव आने दीजिए, रावत को उनकी असली जगह दिखा दूंगा।
प्रश्न - तो भाजपा क्या आपको सीएम बना देगी?
हरक - मैंने इसके लिए यह सब किया भी नहीं। मेरे मन में यह वर्ष 2012 में जरूर था। 2007 से बतौर नेता प्रतिपक्ष सरकार को सदन में जो घेराबंदी की। विपरीत परिस्थितियों में नई जगह रुद्रप्रयाग में जाकर जीत हासिल की। कई विधानसभाओं में जीत दिलवाई। उस समय मुझे लगा कि पार्टी मुझे मौका देगी। जब बहुगुणा सीएम घोषित हुए तो मैं हरीश रावत के साथ खड़ा हो गया। दरअसल, मुझसे धोखा हुआ था। दिल्ली में मुझे उद्योग भवन बुलाया गया जहां सुरेश पचौरी ने कहा कि तुम सीएम फाइनल हो गए हो। यहां तक कि गुलाम नबी और अहमद पटेल को धन्यवाद देने तक को कहा गया। हरीश के साथ इसलिये खड़ा हुआ था कि वे बहुगुणा की मुखालफत कर रहे थे।
प्रश्न - हरीश रावत से ऐसे क्या मतभेद थे, जो आप उन्हें पैदल करने में जुट गए?
हरक - हरीश रावत कई बार सांसद रह चुके। केंद्रीय मंत्री रह चुके। सीएम रह चुके। प्रधान मंत्री के अलावा कोई पद नहीं जिस पर वे न रहे हों, लेकिन लेकिन वे हर उस आदमी से डरते हैं, जिनका कद कल उनको चुनौती दे सकता है। हरीश रावत, किसी का भी विश्वास नहीं करता। जो मुख्यमंत्री अपने सलाहकारों, ओएसडी के भरोसे सरकार चलाए, उसकी सरकार कभी जनहित के निर्णय नहीं लेगी। आप प्रीतम सिंह-यशपाल से अकेले में मिलो उनका दर्द पता चल जाएगा, इंदिरा हृदयेश क्या खुश हैं? कुछ लोग दबकर रह जाते हैं, मैं ऐसा नहीं हूं। यह सिद्धान्त की लड़ाई थी, जीतने के लिए जो कुछ कर सकता था किया।
प्रश्न - स्टिंग भी? तमाम लोगों का मानना है कि इसके पीछे सारा खेल आपका था। इससे तो उल्टे आप भी फंस गए?
हरक - सीबीआई ने मुझे बुलाया था उनको भी मैंने साफ किया है। यह मैने नहीं किया न मेरी प्लानिंग थी। चैनल संचालक ने सीएम से टेलीफोन पर बात करते हुए मुझे कान्फ्रेंस में लिया। उसने कहा कि इनसे बात कर लो। मैंने बात की। मेरे दिमाग में था ही नहीं कि बात किस लिये हो रही है। उसके बाद सीएम, चैनल संचालक से मिले। उसके बाद फिर संचालक का फोन मुझे आया कि हरीश रावत बात करेंगे। हरीश रावत ने कहा कि आप तो सस्ते में मान गए। दूसरा स्टिंग भी उसी चैनल के लोगों ने गोपनीय ढंग से किया उनका संवाददाता मेरे घर पर आया था इसी बीच मदन बिष्ट आ गए। उसने कब हमारी बात रिकार्ड कर ली मुझे पता भी नहीं।
प्रश्न - एक आरोप हमेशा आप पर लगता है कि आप जब सत्ता में आते हैं तो आपके करीबी बड़ी कुर्सियों पर बैठ जाते हैं?
हरक - मुझे एक बात बताओ अगर कोई व्यक्ति मेरा चुनाव के समय में साथ देता है तो क्या में सत्ता में आने के बाद उसे भूल जाऊं। उस पर जितनी अखबार बाजी करो मैं पीछे नहीं हटता। कोई भी अखबार लिखता रहे, मैंने बड़सार विवि में अपने बहनोई को लगाया तो लगाया। मैंने उनका कर्ज चुकता कर दिया। अब हरीश रावत हटा रहा है तो हटा दे।
प्रश्न - आप कहते हैं कि हरीश रावत बदले की भावना से काम कर रहै हैं तो जो आपने किया वह क्या है?
हरीश रावत मेरे करीबियों को पदों से हटाकर, उपनल से नौकरी समाप्त कर और मेरे खिलाफ जांच बैठा कर जो कर रहे हैं वह मुख्यमंत्री का काम नहीं है। मुझे भी पता है कि वीरेंद्र रावत की मिसेज का खटीमा में डिग्री कालेज है, उसमें खामियां है। सीएम के बच्चों के नाम पर, दिल्ली में पेट्रोल पंप हैं, केंद्र सरकार से बोल कर सैंपल भरवा कर बंद करवा सकता हूं। लेकिन मैं इस तरह की राजनीति पर विश्वास नहीं करता। हरीश रावत को हम विधायकों की खरीद-फरोख्त, खनन और एफएल-2, स्टिंग प्रकरण पर घेरेंगे।
प्रश्न- लोग हरक सिंह को गर्लफ्रेंड मैन भी कहते हैं?
हरक - किसी भी व्यक्ति की छवि खराब करने के लिए सबसे आसान तरीका महिला से उसका नाम जोड़ दो। जैनी प्रकरण में मेरा नाम जोड़ा, लेकिन अभी तक मेरी कोई संलिप्तता नहीं पाई गई। मैंने बीएस नेगी को उद्यान विभाग का डायरेक्टर बनाया, 7600 के ग्रेड पे पर। किसी ने नहीं पूछा न लिखा कि विधिवत है या नहीं। उधर, दमयंती रावत को तराई बीज विकास निगम की निदेशक बनाया तो हंगामा मच गया। मैंने चार लड़कियां कहीं नौकरी पर रखवाई तो आरोप लग गया कि मेरे रिश्ते हैं, लेकिन मैंने जो दूसरे लोगों को नौकरी या पद दिए उनके बारे में बात नहीं होती। यह सब साजिश है कि हरक को बदनाम करो।