15 दिसंबर को नरेंद्र मोदी की शंखनाद रैली से खेल विभाग की लाखों की कमाई मारी गई।
निशुल्क आवंटित हुआ परेड ग्राउंड
सिर्फ तीन दिन के लिए निशुल्क आवंटित परेड ग्राउंड दस दिनों तक आयोजकों के कब्जे में रहा। इतना ही नहीं रैली के दो दिन बाद भी आयोजक यहां से सामान नहीं समेट पाए हैं।
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शहर के बीचों-बीच स्थित परेड ग्राउंड के आधे हिस्से में खेल विभाग ने खेल परिसर बनाने का काम शुरू करा दिया है जबकि शेष आधे हिस्से को व्यावसायिक उपयोग के लिए आरक्षित कर दिया गया है। इस हिस्से में हर महीने ट्रेड फेयर, प्रदर्शनी आदि लगती रहती हैं।
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इसके लिए खेल विभाग आयोजकों से किराया वसूलता है। जानकारी के अनुसार आयोजनों से खेल विभाग कम से कम 35 से 40 हजार रुपए प्रतिदिन की आय हो जाती है। सरकारी कार्यक्रम, मेलों और राष्ट्रीय आयोजनों के लिए ही मैदान निशुल्क देने का नियम है।
खेल विभाग को लाखों का नुकसान
इस बीच भाजपा की शंखनाद रैली के कारण करीब 10 दिन तक मैदान पर न तो कोई मेला लग सका और न ही कोई अन्य आयोजन हुआ। दूसरी ओर भाजपा को रैली के लिए मैदान निशुल्क दिया गया था। ऐसे में खेल विभाग को लाखों का नुकसान उठाना पड़ा।
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दरअसल भाजपा की शंखनाद रैली के लिए 13 से 15 दिसंबर तक परेड ग्राउंड आरक्षित किया गया था। इस दौरान 12 दिसंबर तक यहां खादी प्रदर्शनी लगनी थी मगर मैदान 9 नवंबर को ही खाली करा दिया गया था।
शासन स्तर से मैदान निशुल्क दिए जाने के निर्देश मिले थे। इसके बाद तीन दिन के लिए मैदान निशुल्क दिया गया। अगर शासन ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए पहले ही मैदान ले लिया था तो उस पर हम कुछ नहीं कर सकते।
- अजय अग्रवाल, उप निदेशक, खेल