उत्तराखंड के एक दर्जन से अधिक विभागों के 71 घोटालों की जांच के लिए गठित विशेष जांच आयोग की रिपोर्ट को अब गड़े मुर्दे कहा जा रहा है।
नेताओं की यह कोशिश है कि इन घोटालों को भुला दिया जाए, ताकि कई दिग्गजों को कटघरे में खड़ा होने से बचाया जा सके। आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद 17 मामलों को शासन ने सतर्कता अधिष्ठान को सौंप दिया है। सतर्कता अधिष्ठान को ज्यादातर विभागों के घोटालों से संबंधित साक्ष्य मिलने में मुश्किल आ रही है।
विशेष जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंपी थी। कुछ घोटालों की जांच सतर्कता अधिष्ठान को देकर इतिश्री कर
ली गई है। विभिन्न विभागों से संबंधित घोटालों और अनियमितताओं की जांच वर्ष 2008 से 11 तक चार न्यायमूर्तियों ने की।
आयोग को जांच के लिए जो मामले दिए गए थे, उनमें तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष हरक सिंह रावत के वर्ष 2002 से 7 तक के
मामले हैं। जेट्रोफा बायो फ्यूल बोर्ड का घोटाला है।
इसमें फर्जी यात्रा भत्ता बिलों को बनाकर सरकार को चूना लगाया गया। बार-बार शासन को पत्र लिखने के बावजूद इसके साक्ष्य अधिष्ठान को नहीं मिल पा रहे। उत्तराखंड बैंबू बोर्ड में करोड़ों की अनियमितता का भी मामला शामिल है। आयोग की जांच में नेताओं और मंत्रियों का वह मामला भी शामिल है, जिसमें वन मोटर मार्गों के सुदृढ़ीकरण के लिए दी गई करोड़ों की धनराशि हड़प ली गई।
दूसरे मामले में विवेकाधीन कोष से करोड़ों रुपये की धनराशि फर्जी व्यक्तियों के नाम से निकाल ली गई। इसके अलावा राज्य के आरक्षित एवं संरक्षित वनों में निर्माण के नाम पर करवाए गए कार्यों में 80 करोड़ के घोटाले की जांच भी आयोग ने की थी। विशेष जांच आयोग का गठन भाटी-त्रिपाठी आयोग के पहले कराया गया था, लेकिन जांच के बाद इस दिशा में कार्रवाई नहीं हुई।
कुछ मामलों की जांच सतर्कता अधिष्ठान कर रहा है। कानून अपना काम कर रहा है। देर भले ही हो जाए, लेकिन दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। दुर्भावना से कोई काम नहीं किया जाएगा।
- सुरेंद्र कुमार, सलाहकार, मुख्यमंत्री
विशेष जांच आयोग को दिए गए अन्य मुख्य मामले
उद्यान विभाग-2
प्रशिक्षण एवं सेवा योजन-1
पर्यटन आबकारी-1
तकनीकी शिक्षा-2
नगर विकास विभाग-4
लोक निर्माण विभाग-4
लघु सिंचाई-3
आपदा प्रबंधन-4
ग्राम्य विकास विभाग-2
राजस्व विभाग-2
सिंचाई विभाग-1
चिकित्सा विभाग-1
सूचना प्रौद्योगिकी-3
कृषि विभाग-1
वन विभाग-1
खेल विभाग-1
परिवहन विभाग-1