उत्तराखंड के वर्तमान शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी उत्तर प्रदेश के विकल्पधारी शिक्षकों को यूपी के लिए कार्यमुक्त करने की मांग पर कभी सड़कों पर उतरे थे और अब राज्य सरकार में मंत्री हैं, लेकिन विकल्पधारी शिक्षक अब भी उत्तर प्रदेश नहीं पहुंच पाए हैं।
प्रदेश में बारह सौ से अधिक विकल्पधारी शिक्षक यूपी के लिए कार्यमुक्त किए जाने को अधिकारियों और मंत्रियों के चक्कर लगा रहे हैं। राज्य गठन के बाद पिछले 16 वर्षों में इन शिक्षकों से विभाग चार बार यूपी के लिए कार्यमुक्त करने का आवेदन मांग चुका है। लेकिन उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों में कार्यरत शिक्षक चाहकर भी कार्यमुक्त नहीं हो पा रहे हैं।
विकल्पधारी शिक्षकों का कहना है कि उनकी चल अचल संपत्ति यूपी में है, जिसे कोई देखने वाला नहीं है। माता पिता भी वृद्ध हो चुके हैं और यहां उन्हें आरक्षण का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है।
हालांकि, मेडिकल, अदला बदली और एनओसी के आधार पर कुछ शिक्षक यूपी के लिए कार्यमुक्त हुए हैं, लेकिन जिनकी पहुंच नहीं है उनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। विकल्पधारी शिक्षक अनिल यादव बताते हैं कि उत्तराखंड यदि आवेदन करने वाले सभी शिक्षकों को सामूहिक एनओसी दे तो शिक्षक खुद के प्रयास से यूपी से एनओसी लाने को तैयार हैं।
विकल्पधारी शिक्षकों को पूर्व में यूपी के लिए कार्यमुक्त किया गया था, लेकिन यूपी से उन्हें वापस लौटा दिया गया, यूपी उन्हें लेने को तैयार नहीं है। इस तरह के शिक्षक जो वहां जाना चाहते हैं विभाग की ओर से उनसे शपथ पत्र देने और यूपी से एनओसी लाने को कहा गया, लेकिन किसी ने अब तक न शपथ पत्र दिया और न ही कोई एनओसी लेकर आया।
- रंजना, अपर सचिव शिक्षा
किसी एक शिक्षक के लिए यूपी से एनओसी लेना आसान काम नहीं है, विभाग उन्हें सामूहिक रूप से एनओसी लाने को कहे और कार्यमुक्त करे।
- संजीव वालियान विकल्पधारी शिक्षक नेता