चुनाव केवल नेताओं के लिए ही खास नहीं होते ये किसी की भी किस्मत बदल सकते हैं। हरिद्वार में रह रहे दरभंगा, बिहार के कुछ लोगों के लिए एक चुनाव ऐसा ही परिवर्तन लेकर आया।
पढ़ें,चुनाव आयोग तक पहुंची बाबा रामदेव की शिकायत
पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान को चुनाव लड़वाने के लिए ये लोग हरिद्वार क्या आए, यहीं के होकर रह गए। यहां की आबोहवा इन्हें ऐसी भाई कि यहीं के बाशिंदे बन गए।
1987 के चुनाव में आए थे
बात सन् 1987 की है। इस वर्ष हरिद्वार संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े थे। उन्हें चुनाव लड़वाने के लिए बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी बिहार से आए थे।
पढ़ें, होटल में हो रही थी जिस्मफरोशी, पहुंची पुलिस
चुनाव बीतने के बाद इनमें से कुछ को हरिद्वार में ही रोजगार की संभावनाएं दिखाई दी तो उन्होंने बिहार लौटने के बजाय पासवान से यहीं कुछ काम दिलवाने की गुजारिश की।
यहीं पर शुरू कर दिया काम
पासवान ने उनकी इस मंशा की चर्चा अपने साथी और चुनाव की कमान संभाल रहे समाजवादी नेता अनिल जेतली से की। तब जेतली ने इनमें से कई लोगों को अपने ज्वालापुर और हरिद्वार स्थित बर्फखानों में काम पर रख लिया था।
पढ़ें, यहां पर भाजपा से पिछड़ गई कांग्रेस
जीवन पासवान, बच्चन पासवान, कैलाश पासवान, मोतीराम और रामदेव पासवान आदि लोगों ने यहीं रहकर अपनी आजीविका शुरू कर दी। बाद में इनके परिवार और कुछ संगी साथी भी इनके पास चले आए।
पढ़ें, पर्वतीय क्षेत्रों में धीरे-धीरे कम हो रहे मतदाता
रामदेव पासवान के अनुसार इस समय उनके सर्किल के करीब 20 परिवार यहां रह रहे हैं। कुछ बर्फखाने में ही काम करते हैं तो कुछ ने सब्जी बेचने से लेकर अपनी सुविधानुसार दूसरे काम कर लिए हैं।
नहीं किया लौटने का मन
ये लोग कहते हैं कि अब यहीं उनका इतना मेल मिलाप बढ़ गया कि कभी वापस लौटने का मन ही नहीं किया वैसे समय-समय पर वे अपने गांव और रिश्तेदारियों में आना-जाना तो लगा ही रहता है।
रामदेव पासवान के अनुसार वे उस समय पासवान के चुनाव में नहीं आते तो शायद ही कभी हरिद्वार पहुंच पाते। सपा नेता अनिल जेतली के अनुसार उन्हें भी इन लोगों से कभी कोई परेशानी नहीं हुई। सब आपस में मेल मिलाप से रह रहे हैं