बांध प्रभावित क्षेत्र प्रतापनगर की आवाजाही को 14 साल से बन रहे चांठी-डोबरा पुल के ऊपर अधिकतम 18 टन क्षमता तक के ही लोडेड वाहन गुजर सकेंगे। लोनिवि वाहनों के भार को नियंत्रित करने को पुल के दोनों तरफ विशेष किस्म की डिवाइस और रेड सिग्नल सिस्टम लगाएगा, ताकि एक बार में एक ही भारी वाहन पुल के ऊपर से गुजर सके। सात मीटर चौड़े इस पुल पर पैदल आवाजाही करने वाले लोगों के लिए दोनों ओर 75-75 सेंटीमीटर चौड़ाई के फुटपाथ बनाए जाएंगे।
वर्ष 2006 से निर्माणाधीन चांठी-डोबरा पुल का काम अब अंतिम चरण में है। कार्यदायी संस्था ने पुल निर्माण में आ रही सबसे बड़ी बाधा पार करते हुए आठ सितंबर को दोनों छोर को जोड़ दिया था। वर्तमान में निर्माण में लगे श्रमिक और अधिकारी पुल के ऊपर पैदल आरपार जा रहे है। इसके बाद पुल पर एडजेस्टमेंट, रेलिंग, पेंटिंग, फुटपाथ आदि काम किए जाएंगे। 725 मीटर लंबे पुल के ऊपर भारी वाहनों को नियंत्रित करने को लोनिवि विशेष तकनीक अपनाएगा। पुल के दोनों साइड विशेष किस्म की डिवाइस लगाई जाएगी।
इस डिवाइस के माध्यम से पुल के ऊपर 18 टन से ज्यादा भार के वाहनों की आवाजाही रोकी जा सकेगी। साथ ही ट्रैफिक नियंत्रण को रेड सिग्नल सिस्टम भी पुल पर लगाया जाएगा। पुल पर एक बार में केवल एक ही भारी वाहन जा पाएगा। प्रतापनगर के लिए एतिहासिक माने जा रहे इस पुल पर 2015 से अब तक निर्माण कार्य पर एक अरब चार करोड़ खर्च हो चुके हैं, जबकि कोरियाई कंसलटेंट को डिजायन तैयार करवाने से लेकर निर्माण पर तकनीकी सहयोग देने के लिए 15 करोड़ अतिरिक्त खर्च हुए है।
पुल के ऊपर एक बार में 18 टन क्षमता तक के ही लोडेड वाहन जा सकेंगे। वाहनों की क्षमता को आंकने को विशेष डिवाइस और रेड सिग्नल सिस्टम लगाए जाएंगे।
- केएस असवाल, प्रोजेक्ट मैनेजर चांठी-डोबरा पुल