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विशेष राज्य के दर्जे पर पक्ष-विपक्ष हुए एक

Sat, 21 Mar 2015 03:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के विशेष राज्य का दर्जा बरकरार रखने के लिए केंद्र सरकार से पैरवी करने पर सदन में सरकार और विपक्ष में आम सहमति बनी है। सदन में संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश ने प्रस्ताव रखा कि विशेष योजनागत सहायता, सामान्य केंद्रीय सहायता, विशेष केंद्रीय सहायता तथा अन्य केंद्र पोषित योजनाए के लाभ पूर्वतया प्रदान करने का प्रस्ताव रखा।
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विपक्ष ने केंद्र पर आरोप लगाने की बात पर तो आपत्ति जताई, लेकिन उत्तराखंड के हित में प्रस्ताव पर मिलकर केंद्र से सिफारिश करने की सहमति दी। प्रस्ताव सर्वसम्मति से केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

विधानसभा में हुई चर्चा में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि केंद्र सरकार को विरोधी के तौर पर नहीं ले रहे परंतु केंद्र की बनाई व्यवस्था में किए गए परिवर्तन से राज्य को लगभग तीन हजार करोड़ का नुकसान हुआ है, जो हमारी लिए बड़ी चिंता है।
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पहले 38 से 46 योजनाएं ऐसी थी, जिनमें केंद्र और राज्य का अंशदान अनुपात 90:10 जो अब बदलकर 50:50 कर दिया गया हैं। 8 योजनाएं शत प्रतिशत केंद्र सहायतित थी, जिन्हें पूरी तरह से राज्यों पर छोड़ दिया है। फूड प्रासेसिंग, ई-गर्वनेंस, पुलिस आधुनिकीकरण, पर्यटन, ग्राम्य विकास जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को भी पूरी तरह से राज्यों पर छोड़ दिया गया है।
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भाजपा नहीं करेगी पर्वतीय राज्यों की अनदेखी: भट्ट

नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने कहा कि केंद्र ने समग्र भारत के लिए एक नीति बनाई है। हिमालयी राज्यों को केंद्र पोषित योजनाओं में अंशदान कम करने पर सांसद भगत सिंह कोशियारी सांसद में उठा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सीएम हमारे सांसदों के साथ बैठक कर प्रधानमंत्री या वित्त मंत्री से मुलाकात कर सकते हैं।

उत्तराखंड गठन तब हुआ जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी। ऐसे में भाजपा कभी पर्वतीय राज्यों की अनदेखी नहीं कर सकती। विधायक मदन कौशिक ने भी कहा कि पक्ष विपक्ष औद्योगिक पैकेज में कटौती पर राज्य हित में एक साथ केंद्र से पैरवी कर चुकेहैं।

सीएम ने इस मुद्दे पर सहयोग के लिए विपक्ष का आभार जताया। लोकसभा में मुद्दा उठाने पर भी उन्होंने सांसद भगत सिंह कोश्यारी का भी आभार व्यक्त किया।

सर्वसम्मति से भेजा प्रस्ताव
राज्य में स्थिति वन ग्राम, गोठ, खत्ते टोंगिया व तोक आदि में निवासित नागरिकोंको समुचित अवस्थापना सुविधाएं दिए जाने पर भी पक्ष विपक्ष ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव को पारित किया। केंद्र को भेजे प्रस्ताव में ऐसे क्षेत्रों में रहने वालों को भूमि का अधिकार दिए जाने आदि की दृष्टि से इन वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है।
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