रस्किन बॉन्ड की किताबों में देहरादून (उत्तराखंड) के केक और बेकरी के स्वाद का जिक्र पढ़ने को मिलता है। उस स्वाद को दूनाइट्स के लिए दून के बेकर्स और कन्फेक्शनर्स आज भी अपनी तीसरी पीढ़ी के माध्यम से बाजार में उतार रहे हैं।
देहरादून के बने केक और घी के बिस्कुट-टॉफी की देश-विदेश में आज भी उतनी ही खातिर होती है जितनी कभी आजादी के पहले रही होगी। दून में घूमने आने वाले सैलानी डिब्बों में पैक कराकर यहां की खास वैरायटी को ले जाते हैं।
ऑर्डर दीजिए और ले जाइये रम केक
आईएचएम, ऑस्ट्रेलिया से बेकरी एंड कन्फेक्शनरी में स्पेशल कोर्स कर चुके शहर के बीचोंबीच स्थित क्वालिटी कांपलेक्स में ‘बेक मास्टर्स’ के यंग ओनर नमन राज इस बात से पूरी तरह से सहमत हैं कि इस इंडस्ट्री में बूम तो है। जरूरत है और नई तकनीक की।
कहते हैं वनीला केक के जमाने ने आज रम (प्लम केक) केक की जगह ले ली है जो ऑर्डर पर तैयार किए जा रहे हैं। इसमें रम का एसेंस पड़ता है। किशमिश को रम में सक कराकर लगाया जाता है। पचास वर्ष पहले तक जो केवल अंग्रेजों और क्रिश्चियनों में केक का चलन था, वह आज हिंदू हो या मुस्लिम हर घर में किड्स केक, पिक्चर केक, फ्लॉवर केक आदि विभिन्न फ्लेवर पसंद किए जा रहे हैं।
बकौल नमन, केक और स्पेशल बिस्कुटों-रस्क की ऑनलाइन मांग पूरी करने के लिए जल्द ही वेबसाइट तैयार की जा रही है। नई दिल्ली के श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएट मुदित गुलाटी भी शहर के पुराने बेकर्स एलोरा मेल्टिंग मूमेंट के तीसरी पीढ़ी के ओनर हैं। बताते हैं कि 1953 में दादा केएल गुलाटी ने इसे स्थापित किया।
देहरादून में उस जमाने में केवल वनीला केक बनाए जाते थे लेकिन मेट्रो शहरों की तर्ज पर देहरादून में भी पिछले तीन चार साल से ड्राई केक, फॉन्डेंट केक खासकर थीम केक जिसमें कोई भी फेस या दृश्य देने पर हूबहू केक तैयार कर दिया जाता है। इस तरह के केक की यहां कपल्स और युवाओं में खूब मांग है। रम केक की वैरायटी में रम बॉल भी उपलब्ध है।