ऑनलाइन सर्वे के बहाने लोगों के अरबों रुपए ठगने वाली स्पीक एशिया कंपनी ने जमीन की खरीद-फरोख्त में स्टांप घोटाला भी किया है।
कंपनी का संस्थापक और घोटाले के मास्टर माइंड राम सुमिरन पाल की गिरफ्तारी के बाद इस प्रकरण की भी परतें उधड़ने लगी हैं। जिलाधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम का कहना है कि दिल्ली से ब्योरा मंगाकर जांच की जाएगी।
स्टांप शुल्क नहीं मिला
राम सुमिरन पाल ने जिस अवधि में देहरादून और आसपास के इलाकों में जमीन की खरीदारी और फ्लैट बनाकर बेचे हैं, उस अवधि में राजस्व विभाग को उतना स्टांप शुल्क नहीं मिला है।
हालांकि, बिल्डर और आर्कीटेक्ट बताते हैं कि वर्ष 2011-12 रियल इस्टेट के लिए बूम पीरियड रहा है। इस लिहाज से विभाग को स्टांप शुल्क मिलना चाहिए था।
मामले की छानबीन
अब छानबीन की जा रही है कि इस अवधि में किस-किस ने शहर और आसपास बड़े भूखंड खरीदे हैं। किसने-कितने फ्लैट बेचे हैं।
जिलाधिकारी ने बताया कि पाल ने गिरफ्तारी के बाद जो बयान दिए हैं और पुलिस को जो जानकारी दी है, उसे दिल्ली से मंगाएंगे। इसके अलावा भी मामले की छानबीन की जा रही है।
मानचित्रों की छानबीन होगी
एमडीडीए ने भी मामले में गंभीरता से स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। वर्ष 2011-12 में जमीन की खरीद-फरोख्त, भवन निर्माण और भवनों के मानचित्रों की छानबीन होगी।
एमडीडीए उपाध्यक्ष आर मीनाक्षी सुंदरम का कहना है कि इस प्रकरण की जांच कराएंगे। इसके बाद गड़बड़ी के आधार पर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।