दोनों ही सूरत में कांग्रेस के लिए मुश्किल
समाजवादी पार्टी का इतिहास देखें तो वर्ष 2004 में पार्टी प्रत्याशी राजेंद्र कुमार बाड़ी ने हरिद्वार लोकसभा सीट पर 2,12,085 वोटों के साथ जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में प्रदेश में पार्टी का वोट शेयर 7.93 प्रतिशत था। तब से इस सीट को सपा हमेशा अपने लिए मुफीद मानती आ रही है। इस बार गठबंधन होने की सूरत में भी सपा हरिद्वार व नैनीताल लोकसभा सीट पर दावेदारी पेश कर रही है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. राकेश पाठक का कहना है कि इन दोनों सीटों पर पार्टी के लिए अपेक्षाकृत जीत की राह आसान है। उन्होंने ये भी कहा कि गठबंधन कामयाब न होने की सूरत में उनकी पार्टी पांचों सीटों पर चुनाव लड़ने से गुरेज नहीं करेगी। दोनों ही सूरत में कांग्रेस के लिए मुश्किलें पैदा होंगी।
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हरिद्वार-नैनीताल पर क्यों है नजर
सपा नेताओं की मानें तो हरिद्वार में धर्मपुर विधानसभा सीट को छोड़कर ज्यादातर विधानसभा क्षेत्रों में उनका वोट बैंक अच्छा है। इसी प्रकार, नैनीताल लोकसभा क्षेत्र में भी ऊधमसिंह नगर, हल्द्वानी समेत कई शहरों में पार्टी कॉडर वोट मजबूत मानती है। दूसरी ओर, बसपा का तर्क है कि हरिद्वार लोकसभा में भगवानपुर समेत कई विधानसभा ऐसी हैं, जहां उनका कॉडर वोट और पिछड़ा वर्ग का वोट काफी है। नैनीताल सीट पर भी पार्टी नेता इसी गणित को जीत का सूत्र मानते हैं।