फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नैनीताल के लिए रोप-वे चलाने की तैयारी

Fri, 19 May 2017 11:08 AM IST
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
ropeway
विज्ञापन
नैनीताल पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में उसे कम करने और सैलानियों को आकर्षित करने के लिए शासन अब रोप-वे को विकल्प के रूप में तलाश रहा है। इसके अलावा केदरनाथ धाम के श्रद्धालुओं लिए भीा रोप-वे बनाने पर विचार किया जा रहा है।
विज्ञापन


पर्यटन नगरी होने के कारण सैलानियों का खासा दबाव बढ़ जाता है। सबसे ज्यादा समस्या वाहनों के कारण होती है। हर बार मैनेजमेंट प्लान बनाना पड़ता है। मौजूद समय में काठगोदाम-नैनीताल मार्ग की चौड़ाई टू लेन तक नहीं है। इसके कारण भी परेशानी आती है। सचिव पर्यटन शैलेश बगौली का कहना है कि इन सभी बिंदुओं का दृष्टिगत रखकर नैनीताल के लिए अन्य वैकल्पिक योजनाओं पर विचार किया गया है।

इसी के तहत काठगोदाम और कालाढूंगी दोनों जगहों से रोप-वे नैनीताल तक चलाने की योजना बनाई गई है। इसी क्रम में टेक्नो इकोनॉमी फिजबिलटी स्ट्डीज कराने का फैसला किया गया है। यह स्टडी शुरू भी हो गई है, इसके आधार पर अगला कदम उठाया जाएगा।
विज्ञापन


अगर रोप-वे चलता है, तो सैलानियों के लिए नया आकर्षण मिलेगा। इसी तरह केदारनाथ धाम के लिए भी रोप-वे चलाने का भी विचार है। हेमकुंड के लिए करीब डेढ़ साल पहले रोप-वे चलाने की योजना बनाई गई थी, इसके लिए एक संस्था का चयन किया गया। इस संस्था से अगले सप्ताह रिपोर्ट मांगी जाएगी, अगर कार्य संतोषजनक नहीं है, तो अन्य को भी कार्य देने पर विचार किया जाएगा।

36 किमी की दूरी तय करनी पड़ती
काठगोदाम से नैनीताल के बीच 34 किलोमीटर की दूरी है। वहीं, कालाढूंगी से नैनीताल पहुंचने में करीब 36 किमी का सफर तय करना होता है। नैनीताल की यात्रा सुगम करने के लिए नैनीताल मार्ग पर रानीबाग में टनल बनाने से लेकर मार्ग चौड़ा करने की योजना भी कार्य चल रहा है।

अंग्रेजों ने ट्रेन पहुंचाने की बनाई थी योजना
18 वी सदी में अंग्रेजों ने कुमाऊं में ट्रेन पहुंचा दी थी। इसके बाद अंग्रेजों ने काठगोदाम से नैनीताल के लिए ट्रेन चलाने की योजना बनाई थी। इसके लिए तमाम कवायद भी की गई, लेकिन बाद में योजना पूरी नहीं हो सकी।

वनाधिकारी भी मानते बेहतर विकल्प
वनाधिकारी भी मानते हैं कि रोप-वे बेहतर विकल्प है। प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव डीवीएस खाती कहते हैं कि केदारनाथ के लिए जहां प्रतिबंधित एरिया नहीं है, वहां से रोप-वे बनाया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें