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18 साल से दर-दर भटक रहे हैं कारगिल शहीद का पिता, मन में सिर्फ एक ख्वाहिश

Sun, 23 Jul 2017 09:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,देहरादून
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ले. कर्नल बृजमोहन गुप्ता (रिटायर्ड)
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देश के लिए अपनी जान देने वाले महावीर चक्र विजेता के पिता पिछले 18 सालों से चक्कर काट रहे हैं। सिस्टम से जब वे हार गए तो उन्होंने ऐसा कदम उठाया कि आप भी रो पड़ेंगे। जानिए...
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कारगिल युद्ध में महज 29 वर्ष की उम्र में दुश्मनों को धूल चटाकर अपने प्राणों की आहूति देने वाले वसंत विहार निवासी महावीर चक्र विजेता मेजर विवेक गुप्ता की शहादत पर बल्लीवाला चौक से लेकर पंडितवाड़ी तक की सड़क का नाम शहीद विवेक के नाम रखने की घोषणा 18 साल में पूरी नहीं हो पाई।

अब नगर निगम की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव को यह कहकर खारिज कर दिया गया कि वसंत विहार चौक का पहले से शहीद के नाम पर नामकरण किया गया है। शहीद के 83 साल के पिता ले. कर्नल बृजमोहन गुप्ता (रिटायर्ड)  निगम के इस फैसले से बेहद खफा और हताश है। उनका कहना है कि यह तो विवेक की शहादत का सरासर अपमान है।
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सरकार या नगर निगम को यदि सड़क का नामकरण नहीं करना था, तो घोषणा क्यों की गई? अमर उजाला से बातचीत में रुंधे गले से ले. कर्नल बृजमोहन गुप्ता (रिटायर्ड) कहते है कि बेटा जब देश के लिए शहीद हुआ तो सरकार व राजनीतिक दलों ने बड़ी बड़ी घोषणाएं की। जिनमें बल्लीवाला चौक से लेकर पंडितवाड़ी तक की सड़क का नाम शहीद विवेक के नाम पर रखना भी शामिल थी। घोषणा के तीन वर्ष बाद दिखावे के लिए पत्थर भी लगा दिए गए। लेकिन बल्लीवाला फ्लाईओवर की जद में आने से उन पत्थरों का नामो निशां भी मिट गया।

वर्ष 2012 में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगने पर पता चला कि निगम के अभिलेखों में मार्ग का नाम दर्ज ही नहीं है। सूचना आयोग में सुनवाई के दौरान आयोग ने कई बार निगम को इस संबंध में आदेश भी दिए। लेकिन कोई कुछ नहीं हुआ। अब विगत 30 मार्च को हुई निगम की बोर्ड बैठक में सड़क के नामकरण के प्रस्ताव को यह कहकर रद्द कर दिया कि वहां पहले से वसंत विहार चौक का नाम शहीद मेजर विवेक चौक किया जा चुका है। बताया कि इस संबंध में वो एक बार मुख्यमंत्री से मिलने भी गए लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई। कहा कि शौर्य दिवस पर होने वाले समारोह में वह इस मुद्दे को उठाएंगे।
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पाकिस्तान के लिए खौफ का दूसरा नाम था मेजर विवेक

शहीद मेजर विवेक गुप्ता
आपरेशन विजय के दौरान 12 जून 1999 को मेजर विवेक गुप्ता ने टोलोलिंग चोटी को पाक घुसपैठियों से मुक्त कराने के दौरान शहीद मेजर विवेक गुप्ता ने अदम्य साहस का परिचय दिया था। पाकिस्तानी सेना व आतंकियों ने सामरिक नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण टोलोलिंग पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया था।

कमान अधिकारी ने मेजर विवेक गुप्ता को टोलोलिंग पहाड़ियों से पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ वहां पर दुबारा कब्जा करने का आदेश दिया। सैन्य नजरिए से यह काम बेहद कठिन माना जाता है। लेकिन मेजर विवेक गुप्ता व उनके साथियों ने इसे सहर्ष स्वीकार किया। अभूतपूर्व साहस, चातुर्य, बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए उस पहाड़ी से घुसपैठिये कब्जाधारकों को खदेड़ डाला।

2 राजपूताना राइफ ल के मेजर विवेक गुप्ता के नेतृत्व में 12 जून की रात को टोलोलिंग चोटी को फ तेह के लिए कंपनी रवाना हुई। ऊंचाई पर बैठे दुश्मन ने हमला किया, जिसमें मेजर गुप्ता को दो गोलियां लगी, लेकिन घायल हालत में मेजर गुप्ता ने तीन दुश्मनों को ढेर कर बंकर पर कब्जा किया। वहां तिरंगा लहराया। 13-14 जून की रात्रि को इस बेहद चुनौतीपूर्ण लक्ष्य को प्राप्त कर लिया।

बुरी तरह घायल होने पर भी भी अंतिम सांस तक जूझते रहे। उनके द्वारा दुश्मन के कई सैनिक मारे गए और बड़ा क्षेत्र हमारी सेना के कब्जे में आ गया। इन सब के कारण ही उन्होंने मरणोपरांत महावीर चक्र प्रदान किया गया था। इस दौरान हमारे 11 सैन्य कर्मी भी शहीद हुए थे। 13 जून 1992 में उन्होंने भारतीय सैन्य अकादमी में कमीशन प्राप्त किया था।

महापौर विनोद चमोली का कहना है कि हम दिल से शहीदों का सम्मान करते है। शहीद मेजर विवेक गुप्ता के सम्मान में वसंत विहार चौक का नाम उनके नाम किया गया है और एक स्मारक बनाया गया है। सड़क के नामकरण का प्रस्ताव बोर्ड की बैठक में आया था। बोर्ड सदस्यों ने उस पर सहमति नहीं दी। जिस कारण वो प्रस्ताव रद्द हो गया।

 
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