उन्होंने पुलिस को सारी बात बताई और एफआईआर दर्ज करने को कहा। पुलिस ने सिपाही के परिजन को यह कहकर एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया कि गुमशुदगी दर्ज करा लो, आपका काम हो जाएगा। इसके बाद सिपाही का भाई वापस घर लौट गया। सोमवार को दोबारा कुलदीप कोतवाली पहुंचे और एफआईआर दर्ज कराई।
लापता सिपाही के छोटे भाई कुलदीप ने बताया कि पुलिस ने सात दिन तक उनके बड़े भाई की एफआईआर दर्ज नहीं की। इस कारण उनके परिवार को बहुत निराशा हुई। पुलिस की ओर से टाल मटोल का रवैया शर्मनाक है। कुलदीप के अनुसार, उन्होंने दो जून को पुलिस को बताया भी था कि उनके बड़े भाई के पास मोबाइल फोन भी नहीं है। इसके बावजूद पुलिस ने मदद करने के बजाए टालमटोल करते हुए इश्तहार छपाने की सलाह दे डाली।
लापता सिपाही के परिजन मुझ से सोमवार को मिले, जिन्हें मेरी ओर से कार्रवाई का आश्वासन देकर एफआरआई दर्ज कर ली गई है। पूर्व में दो जून को किस पुलिसकर्मी ने उन्हें गुमशुदगी दर्ज करने से मना किया। यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है।
- रितेश शाह, कोतवाल ऋषिकेश