दो शातिर ठगों ने पहले एक सामान्य जाति के व्यक्ति को अनुसूचित जाति की भूमि धोखे से 8.83 करोड़ में बचे दी। जब पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया तो आरोपियों ने समझौते के लिए शिकायतकर्ता के हाथ-पैर जोड़े और फिर से धोखाधड़ी कर अनुसूचित जाति की भूमि बेच दी। शिकायतकर्ता की दूसरी तहरीर पर पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की धारा में मुकदमा दर्ज किया है।
बीते वर्ष दिसंबर में कोतवाली पुलिस को नेहरू कॉलोनी निवासी राजीव आनंद ने पांच लोगों के खिलाफ अनुसूचित जाति की भूमि धोखे से बेचकर 8.83 करोड़ रुपये हड़पने की तहरीर दी थी। आरोपियों में प्रतीतपुर, धर्मावाला निवासी जगवीर सिंह, लाखन सिंह, इकराम, इस्तियाक और अब्दुल कादिर शामिल थे। इनमें जगवीर सिंह और लाखन सिंह की मुख्य आरोपी थे। पुलिस ने पांचों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। ताजा मामले में पुलिस को दी तहरीर में राजीव आनंद ने बताया कि मुकदमा दर्ज होने के बाद 22 फरवरी को जगवीर सिंह ने उनसे संपर्क किया।
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उसने बताया कि उसे जानकारी नहीं थी कि लाखन ने उनकी भूमि का सौदा किया हुआ है। उसने अपनी भूमि को बेचने और रजिस्ट्री करवाने की बात कही। शिकायतकर्ता ने बताया कि 23 दिसंबर को जगवीर सिंह ने भूमि की रजिस्ट्री की। इसके लिए उन्होंने भूमि की शेष धनराशि के चेक दिए और 36,000 रुपये का नकद भुगतान किया। शिकायतकर्ता के मुताबिक जांच करने पर पता चला कि उन्हें जो भूमि बेची गई है वह जगवीर सिंह ने पहले ही लाखन सिंह के नाम कर दी थी। यह भूमि भी अनुसूचित जाति का है। कोतवाली प्रभारी ने बताया कि जगवीर सिंह और लाखन सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र आदि संबंधी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।