भारत के होटल और मॉल अब सौर ऊर्जा से जगमगाएंगे। कामर्शियल भवनों के निर्माण के लिए बिल्डरों को नक्शे के साथ यह शपथपत्र भी देना होगा कि भवन में सोलर प्लांट अनिवार्य रूप से लगाया जाएगा।
शासनादेश जारी करने का आदेश दिया
शपथपत्र न देने पर नक्शा पास नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में शहरी आवास विकास सचिव को शासनादेश जारी करने का आदेश दे दिया है।
पहले चरण में देहरादून, ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार के विकास प्राधिकरणों में यह व्यवस्था लागू की जाएगी। राज्य के विभिन्न जिलों में तेजी से वाणिज्यिक भवनों का निर्माण हो रहा है।
इन भवनों में बिजली की भारी खपत होती है, जबकि प्रदेश में जलविद्युत परियोजनाओं से उम्मीद के अनुरूप उत्पादन नहीं मिल पा रहा। इससे प्रदेश को दूसरे राज्यों से बिजली खरीदनी पड़ रही है।
इस समस्या को देखते हुए हाल ही में सीएम हरीश रावत ने शहरी आवास विकास के सचिव और विभिन्न प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों संग बैठक की थी।
तय हुआ कि अब जो भी वाणिज्य भवन बनेगा, उसका नक्शा तभी पास होगा जब बिल्डर विद्युत खपत के अधिकांश हिस्से की पूर्ति सौर ऊर्जा से करने का शपथपत्र देगा।
स्पष्ट किया गया है कि होटलों में लाइट, गीजर, फव्वारे और मॉल में लाइट, फव्वारे आदि सौर ऊर्जा से चलाए जाएंगे। इसके बाद जो ऊर्जा चाहिए होगी, वही ऊर्जा निगम से सप्लाई की जाएगी।
बैठक में मुख्यमंत्री ने अपर सचिव विनय शंकर पांडे को शासनादेश जारी करने के निर्देश दिए हैं। एमडीडीए सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि शासनादेश के बाद भविष्य में सभी वाणिज्यिक भवनों में सौर ऊर्जा लगाना जरूरी हो जाएगा।
नगर निगम भी कर रहा उरेडा संग काम
नगर निगम और उरेडा भी शहर के आवासीय भवनों में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। जुलाई आखिरी सप्ताह में मुख्य नगर अधिकारी हरक सिंह रावत और उरेडा के अधिकारियों के बीच इस संबंध में बैठक भी हुई।
एमएनए ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत शहर के हर घर में उरेडा सोलर एनर्जी प्लांट और एलईडी लैंप सब्सिडी के साथ वितरित करेगा। बताया कि सरकारी कार्यालयों में भी सौर ऊर्जा की शुरुआत की जाएगी।
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद कामर्शियल बिल्डिंगों में सोलर प्लांट लगाने के लिए जरूरी नियम बनाए जा रहे हैं। जल्द ही इस संबंध में शासनादेश भी जारी हो जाएगा।
- विनय शंकर पांडे, सचिव, शहरी विकास