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अब एमडीडीए में सॉफ्टवेयर पास करेगा नक्शे, सात दिनों में हो जाएगा काम

Wed, 28 Aug 2019 12:46 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : फाइल फोटो
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मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) में बुधवार से इंजीनियर नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर नक्शों का परीक्षण करेगा। इसके जरिये नक्शा केवल सात दिनों के भीतर पास होने का दावा किया जा रहा है। अगर बायलॉज के मुताबिक नक्शे में कोई गड़बड़ी मिलती है तो सॉफ्टवेयर तत्काल उसकी सूचना आर्किटेक्ट और आवेदक को देगा। सब कुछ सही मिलने पर ही नक्शा पास हो सकेगा।

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इस व्यवस्था से लोगों को काफी राहत मिलेगी। अभी तक नक्शा पास कराने के लिए दो-दो महीने प्राधिकरण के चक्कर काटने पड़ते थे। एमडीडीए उपाध्यक्ष डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि ऑटोकैड (आटोमैटेड डेवलप्ड कंट्रोल रुल्स) सिस्टम को और प्रभावी बनाया गया है। नक्शे के आवेदन के लिए प्राधिकरण की वेबसाइट (एमडीडीएऑनलाइन.इन) पर लॉगिन और रजिस्ट्रेशन करना होगा।
 
आर्किटेक्ट के जरिये लैंडयूज और भवन स्वामी का नाम डालने के साथ नक्शा ऑनलाइन अपलोड करना होगा। इसके बाद साफ्टवेयर परीक्षण करेगा। नक्शा बायलॉज के मुताबिक होने पर वह पास होगा, अगर कोई कमी है तो उसकी सूचना एसएमएस और ई-मेल के जरिये भवन मालिक और आर्किटेक्ट के पास पहुंच जाएगी। ऐसा होने से वह खामियों को दुरुस्त कर सकेंगे। एमडीडीए का दावा है कि सॉफ्टवेयर के जरिये सात दिन के भीतर नक्शा पास कर दिया जाएगा।
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आर्किटेक्ट नहीं कर सकेंगे गड़बड़ी 
एमडीडीए उपाध्यक्ष ने बताया कि नई व्यवस्था में कोई आर्किटेक्ट नक्शे में गड़बड़ी नहीं कर सकेगा। इसमें उनकी परफॉरमेंस भी देखी जाएगी। एक आर्किटेक्ट के एक जैसे कितने ऑब्जेक्शन आ रहे हैं। उस पर भी नजर रखी जाएगी।

यह होता है ऑटोकैड सिस्टम 
ऑटोकैड सिस्टम एक सॉफ्टवेयर है। जिसमें बिल्डिंग बायलॉज के मुताबिक सभी प्रावधान फीड हैं। नक्शा सॉफ्टवेयर में अपलोड करते ही बायलॉज के प्रावधानों के अनुसार सिस्टम खुद परीक्षण करेगा। उदाहरण के लिए किसी मकान में सेटबैक बायलॉज से कम छोड़ा गया है या एफएआर ज्यादा है अथवा सड़क की चौड़ाई कम है तो नक्शा पेंडिंग होने के साथ ही एसएमएस और मेल से इसकी सूचना तुरंत आवेदक को मिल जाएगी। 

मुख्यमंत्री और मंत्री को दी जानकारी 
एमडीडीए उपाध्यक्ष डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने मंगलवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और शहरी विकास एवं आवास मंत्री मदन कौशिक को नई व्यवस्था के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था से सात दिन में ही भवन का नक्शा पास हो जाएगा। लोगों को नक्शा पास कराने के लिए प्राधिकरण के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इस दौरान सचिव आवास नितेश झा, एमडीडीए सचिव जीसी गुणवंत, एसएल सेमवाल, संजीवन सूंठा भी मौजूद रहे। 

नए सॉफ्टवेयर की प्रमुख खासियतें 
- आवेदक आवेदन, समीक्षा और फाइल ट्रैक कर सकते हैं।
- जीआईएस आधारित मास्टर प्लान से भू-उपयोग की जानकारी मिलेगी। 
- देवभूमि सॉफ्टवेयर के इंटीग्रेशन से स्वामित्व सत्यापन किया जा सकेगा। 
- जमा करने से पूर्व बाइलॉज के सापेक्ष मानचित्र को सत्यापित किया जा सकेगा। 
- हर प्रपोजल को समय के आधार पर कलर कोडिंग किया गया है, जिससे किसी भी पत्रावली के समय से निस्तारण न होने पर उपाध्यक्ष के डैशबोर्ड पर दिखने लगेगी। 
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- सिस्टम में कारण बताओ नोटिस को भी शामिल किया गया है। किसी भी गलत निस्तारण पर सिस्टम से ही कारण बताओ नोटिस जारी किया जा सकेगा। 
- डैशबोर्ड पर हर कर्मचारी-अधिकारी की परफॉरमेंस भी देखी जा सकेगी। 
- विभिन्न सरकारी विभागों से आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए भी इस प्रणाली को सिंगल विंडो सिस्टम से इंटीग्रेट किया गया है।
- सिस्टम को आयुक्त कार्यालय एवं एसएसपी कार्यालय से भी इंटीग्रेट किया गया है।

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