समाज कल्याण विभाग कहने को तो कई कल्याणकारी योजनाएं चला रहा है लेकिन यह सिर्फ कागजी खानापूर्ति भरने के लिए ही है। योजनाओं का हाल है कि योजना शुरू हुए दो साल हो गए लेकिन इनके लिए एक भी आवेदन नहीं आया।
पांच से अधिक योजनाओं का यही हाल है। विभाग की सिर्फ चार योजनाओं का लाभ ही लोग लगातार ले पा रहे हैं। वहीं अधिकारियों की माने तो हर योजना का प्रचार-प्रसार होता है लेकिन लोग रुचि नहीं दिखाते जबकि सच्चाई यह है कि यह सभी योजनाएं एक जैसी हैं, जिनके मानक, मिलने वाली धनराशि भी समान है। ऐसे में लोग अन्य योजनाओं की ओर ध्यान ही नहीं देते।
समाज कल्याण विभाग की ओर से मुख्य रूप से वृृद्धा, दिव्यांग, विधवा और किसान पेंशन योजना चलाई जा रही है। सिर्फ इन चार योजनाओं के लिए ही विभाग के पास लगातार आवेदन आते रहते हैं। जबकि विभाग की ओर से इनके बाद शुरू की गई योजनाओं में लोगों की रुचि नहीं है।
हरीश रावत की सरकार की ओर से एक के बाद एक योजनाओं की घोषणा कर भले ही तब तारीफ पा ली हो लेकिन इन योजनाओं का कोई मतलब भी नहीं क्योंकि यह योजनाएं ऐसे ही लोगों को लाभ देने के लिए शुरू की गई है, जो पहले से ही इन चारों में से किसी न किसी योजना के तहत लाभ पा रहे हैं। ऐसे में यह विभागीय योजनाएं सिर्फ कागजों तक सिमट गई हैं। विभाग के ब्रॉसर भर रही हैं। विभाग की कई ऐसी योजनाएं हैं जिनके शुरू होने के दो साल बाद एक भी आवेदन नहीं आया है।
इन योजनाओं के लिए नहीं आया एक भी आवेदन
पुरोहित पेंशन योजना
तीलू रौतेली पेंशन योजना
मानसिक रूप से विकलांग, विक्षिप्त व्यक्ति की पत्नी को पेंशन
ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के लिए पेंशन
बौना व्यक्तियों के लिए आर्थिक सहायता
दो सालों में मात्र दो आवेदन
इन योजनाओं के लिए वर्षभर में आने वाले आवेदनों की संख्या
वृद्ध पेंशन योजना - 6000
दिव्यांग - डेढ़ हजार
विधवा - चार सौ
किसान - 20
ये है पेंशनर्स की जिले में संख्या
वृद्धावस्था पेंशनर्स - 58 हजार
दिव्यांग पेंशनर्स - 10 हजार
विधवा पेंशनर्स - 14 हजार
किसान पेंशनर्स - 800
इसलिए नहीं आते आवेदन
नई योजनाओं के लिए आवेदन नहीं आने की सीधी वजह है कि उनके लिए जो भी दायरा तय किया जाता है, उसके तहत पहले से ही लोग पेंशन ले रहे हैं। ऐसे में उसमें से नाम कटवा कोई नई योजना में अपना नाम दर्ज नहीं करवाना चाहता है।