शनिवार को शाम होते-होते चमोली जिले में मौसम ने करवट ली। दिन भर धूप खिली होने के बाद दोपहर बाद आसमान में बादल घिर आए। शाम को ऊँची चोटियों पर जमकर हिमपात हुआ।
चमोली जनपद में शनिवार दोपहर बाद अचानक मौसम खराब हो गया। सुबह से ही धूप खिली हुई थी, लेकिन दोपहर बाद अचानक आसमान में बादल घिर गए। बदरीनाथ, हेमकुंड साहिब, रूद्रनाथ, फूलों की घाटी, गौरसौं बुग्याल के साथ ही ऊंची चोटियों में हिमपात हुआ।
निचले क्षेत्रों में ठंड हवाएं चलने से ठंड बढ़ गई है। पिछले कुछ दिनों से आसमान साफ रहने से सूर्य की किरणों में गर्माहट सी आने लगी थी, लेकिन पुन: मौसम खराब होने से फिर से ठंड लौट आई है।
इस बार यात्रा मार्ग पर नहीं होंगे हिमखंडों के दर्शन
इस बार बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब तीर्थ धाम की तीर्थयात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों को यात्रा मार्ग पर हिमखंडों के दर्शन नहीं होंगे। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर हनुमान चट्टी से कंचन गंगा तक हिमखंड बेहद कम हैं। हाईवे के रड़ांग बैंड में करीब दस फीट का हिमखंड पसरा हुआ है, जबकि बीते वर्ष इन दिनों यहां 30 फीट ऊंचा हिमखंड आया हुआ था।
शीतकाल में बदरीनाथ हाईवे पर हनुमान चट्टी से कंचन गंगा तक सात हिमखंड जम जाते थे, जिन्हें हटाने में सीमा सड़क संगठन को एक माह तक का समय लग जाता था, लेकिन इस बार बारिश और बर्फबारी कम होने से रड़ांग बैंड और कंचन गंगा में ही हिमखंड जमे हुए हैं। जबकि अन्य स्थान बर्फविहीन हैं। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह ने बताया कि बदरीनाथ धाम में इस वर्ष बेहद कम बर्फबारी हुई है।
हालांकि, उन्होंने मार्च माह में धाम में बर्फबारी की उम्मीद जताई है। वहीं, हेमकुंड साहिब में इन दिनों मात्र तीन से चार फीट बर्फ ही जमी है। यात्रा के मुख्य पड़ाव घांघरिया में भी करीब पांच इंच बर्फ है। हेमकुंड गुरूद्वारा प्रबंधन समिति के प्रबंधक सरदार सेवा सिंह का कहना है कि यह पहली बार हुआ कि हेमकुंड साहिब तक फरवरी माह में यात्रा मार्ग खुला हुआ है।
विगत वर्षों तक हेमकुंड की यात्रा शुरू होने से पहले यात्रा मार्ग से बर्फ हटाने के लिए सेना के जवान और सिख सेवादार लगाए जाते थे, लेकिन इस बार हेमकुंड के कपाट खुलने के दौरान तीर्थयात्रियों को यात्रा मार्ग बंद होने का सामना नहीं करना पड़ेगा।