आपदा के बाद सैलानियों की बेरुखी से जूझ रहे पर्यटन स्थलों में बर्फबारी ने नई जान भर दी है।
कारोबारियों के चेहरे खिले
मसूरी में जबर्दस्त बर्फ गिरने के बाद नजारा देखने के लिए सैलानी जुटे, तो देहरादून में भी दूसरे राज्यों से लोग बर्फबारी के बाबत पूछताछ करते रहे। बढ़ते पयर्टकों को देखते हुए कारोबारियों के चेहरे खिल गए हैं।
शुक्रवार रात से जारी लगातार बारिश के बीच पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू हो गई। शनिवार सुबह बर्फबारी ने रफ्तार पकड़ी तो टीवी चैनलों के जरिए खबर देशभर में फैल गई। वीकेंड पर हुई बर्फबारी ने खूबसूरत नजारों को देखने का बेहतरीन मौका दे दिया है।
इन जगहों के पर्यटक पहुंचे
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी वाईएस गंगवार ने बताया कि सुबह से ही लगातार दिल्ली और दूसरे राज्यों से मसूरी और देहरादून स्थित पर्यटन कार्यालय में बर्फबारी की जानकारी के लिए कॉल्स आती रहीं। अधिकांश लोगों का यही सवाल था कि कितनी बर्फ पड़ी है।
उन्हें डर था कि कहीं दिल्ली या दूसरे राज्यों से पहुंचते-पहुंचते यह पिघल न जाए। बहरहाल दून, मसूरी और चकराता के पर्यटन स्थलों पर यूपी, हरियाणा, दिल्ली और पंजाब के पर्यटक पहुंचने लगे हैं।
पर्यटन में आ गई जान
आपदा के बाद लगातार पर्यटकों की बेरुखी से मायूस पर्यटन स्थलों में बर्फबारी से नई जान आ गई है। एक ओर जहां मसूरी में जबर्दस्त बर्फबारी देखने के लिए लोग जुटे तो देहरादून में भी लगातार दूसरे राज्यों से बर्फबारी को पूछताछ होती रही।
यूपी, हरियाणा, दिल्ली और पंजाब के काफी पर्यटकों ने यहां का रुख किया। इससे कारोबारियों के चेहरे खिल गए हैं।
फसलों के लिए सोना
मैदानी इलाकों में हुई जोरदार बारिश को किसान फसल के लिए सोना बता रहे हैं। काश्तकारों ने बताया कि सेब की फसल के लिए यह बर्फबारी वरदान से कम नहीं है।
आडू और खुमानी के लिए भी लाभदायक सिद्ध होगी।गेहूं की फसल के लिए भी यह बारिश लाभकारी मानी जा रही है। हालांकि बर्फबारी और बारिश की अभी और जरूरत बताई जा रही है।
भारी हिमपात बढ़ाएगा बिजली उत्पादन
पहाड़ों पर भारी हिमपात का फायदा गर्मियों में दिखने की पूरी संभावना है। उत्तराखंड की 12 से अधिक जल विद्युत परियोजनाओं के अलावा टीएचडीसी, एनएचपीसी और निजी क्षेत्र की परियोजनाओं का उत्पादन बढ़ेगा।
इससे कम से कम बिजली कटौती होगी और दूसरे राज्यों में भी पर्याप्त बिजली दी जा सकेगी। प्रदेश में कुमाऊं से गढ़वाल तक में बड़े पैमाने पर बर्फबारी हुई है। यह बर्फ लंबे वक्त तक पहाड़ों पर रहेगी।
नदियों में पानी का पर्याप्त स्तर बना रहेगा
तेज धूप निकलते ही बर्फ पिघलनी शुरू होगी। इससे गंगा, यमुना, टौंस समेत दूसरी नदियों में पानी का पर्याप्त स्तर बना रहेगा। जिसके जरिए जल विद्युत परियोजनाएं क्षमता के मुताबिक उत्पादन दे सकेंगी। आमतौर पर कम बर्फबारी से गर्मी में जल विद्युत परियोजनाएं क्षमता के अनुसार उत्पादन नहीं दे पातीं।
बारिश से तो तत्काल फायदा होगा। इससे सर्दी में बिजली उत्पादन बढ़ जाएगा। हिमपात से अप्रैल और मई के दौरान उत्पादन में मदद मिलेगी। अधिक बर्फबारी से गर्मी में काफी हद तक राहत मिलेगी।
- जीपी पटेल, प्रबंध निदेशक, उत्तराखंड जल विद्युत निगम