फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तीन दशक से चल रहे विक्रमों पर गिरी गाज

Wed, 22 Jan 2014 11:11 AM IST
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
विक्रम तीन दशक से देहरादूनवासियों का हमसफर बना हुआ है। सिर्फ पांच से सात रुपए में विक्रम दून की लाइफ लाइन बन गए।
विज्ञापन


बढ़ा दिया गया था विक्रमों का संचालन
मगर डेढ़ साल पहले चकराता रोड के डिवाइडर बंद करने के दौरान विक्रमों का संचालन बढ़ा दिया गया। इसका सिटी बस संचालकों ने विरोध किया। तभी से परमिट के नाम पर विक्रमों के खिलाफ अभियान की पटकथा लिखी जाने लगी।

पढ़ें, 'आम आदमी पार्टी की असलियत आई सामने'

शहर में करीब 33 सालों से विक्रम ठेका परमिट पर फुटकर सवारियां ढो रहे थे। तर्क था कि 1998 से पहले शहर में सिटी बसें नहीं थी, सो विक्रमों को छूट दी गई। 1998 में सिटी बसें सड़कों पर उतरीं। स्टेज कैरिज परमिट सिर्फ उन्हीं के पास था।
विज्ञापन


फिर भी आरटीओ ने विक्रमों को नहीं छेड़ा, क्योंकि व्यवस्था दुरुस्त थी और सभी की सहमति भी। करीब डेढ़ साल पहले चकराता रोड के डिवाइडरों को बंद करने के दौरान प्रेमनगर, कौलागढ़ और एफआरआई रूट के विक्रमों का संचालन ट्रैफिक पुलिस ने बिंदाल पुल से घंटाघर तक बढ़ा दिया।

पढ़ें, घास की जगह मां ने रेत दिया बच्ची का गला

इसका सिटी बस संचालकों ने विरोध किया तो आरटीओ की अध्यक्षता में वार्ता हुई। तय हुआ कि बिंदाल पुल से टोकन लेकर कुछ विक्रम घंटाघर आएंगे और लौट जाएंगे।

प्रेमनगर रूट यूनियन ने विरोध किया तो सिटी बस संचालकों ने सूचना के अधिकार के तहत आरटीओ से जानकारी मांग ली।

पढ़ें, अनुपमा हत्याकांडः राजेश गुलाटी पर फैसला जल्द

पूछा गया कि छह सालों में परमिट शर्तों का उल्लंघन कर चल रहे कितने विक्रमों का चालान किया गया? आरटीओ के सिर्फ एक चालान के लिखित जवाब को लेकर सिटी बस संचालक हाईकोर्ट चले गए।
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया और आरटीओ दून को अभियान चलाने के साथ ही विक्रमों को ऑटो की तरह ठेका परमिट पर चलाने के आदेश दे दिए।

33 सालों से शहर में चल रहे विक्रम
98 में सड़कों पर उतरी थी सिटी बसें

आरटीए में भी रास्ता मुश्किल
आरटीओ ने विक्रम संचालकों को आश्वासन दिया है कि आरटीए मीटिंग में प्रस्ताव देने के बाद उनका परमिट स्टेज कैरिज में बदल दिया जाएगा। मगर यह दांव खारिज हो सकता है।

दरअसल, विक्रम सात सीटर हैं, जबकि स्टेज कैरिज के लिए वाहन सात सीटर से ज्यादा होना चाहिए। हालांकि विक्रम पहले चालक समेत आठ सीटर पास होते थे।

पढ़ें, श्रद्घा से क्यों 'डरते' हैं शक्ति कपूर?

विक्रम संचालकों को टैक्स ज्यादा लगा तो उन्होंने आरटीओ से इसे सात सीटर पास करा लिया। यही परमिट बदलने में मुश्किल खड़ा कर सकता है।  

हम जानते हैं कि एक साथ इतने विक्रमों को सड़कों से नहीं हटाया जा सकता। मगर हम नियमों से बंधे हैं। हमें कोर्ट के आदेश का पालन करना ही होगा।
- दिनेश चंद्र पठोई, संभागीय परिवहन अधिकारी
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें