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भारी बर्फबारी ने तोड़े यह रिकॉर्ड...

Sun, 19 Jan 2014 04:12 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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पहाड़ों की रानी में शनिवार को मौसम का तीसरा हिमपात हुआ। बर्फबारी ने 2002 का रिकॉर्ड तोड़ा। मसूरी सहित धनोल्टी में लगभग बारह साल बाद रिकॉर्ड तोड़ हिमपात हुआ।
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दो से तीन फीट हिमपात
बर्फबारी से 12 वर्षों बाद मसूरी-देहरादून मार्ग पहली बार 6 किलोमीटर पहले ही अवरुद्ध हो गया। मालरोड पर लगभग पांच इंच बर्फबारी हुई। लाल टिब्बा समेत ऊंचाई वाले स्थानों पर दो से तीन फीट हिमपात हुआ। बर्फबारी से नगर का संपर्क उत्तरकाशी और टिहरी जनपद से टूट गया है।

हिमपात के बाद लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। दिनभर लोगों को बिजली, पानी से दो-चार होना पड़ा। मसूरी सहित धनोल्टी में शनिवार सुबह करीब 6 बजे से शुरू हुई बर्फबारी अपराह्न 4 बजे तक होती रही।
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बर्फबारी का आलम यह रहा कि सुबह से ही लगभग एक फीट बर्फबारी के कारण आईटीबीपी गेट पर ही जाम लग गया। लगभग 3 बजे तक स्थानीय निवासियों और सैलानियों को पैदल ही मसूरी मुख्य शहर तक रास्ता नापना पड़ा। बर्फबारी ने होटल व्यवसायियों और व्यापारियों के चेहरे खिला दिए हैं।

बर्फबारी से यातायात बाधित

शनिवार को मसूरी में भारी बर्फबारी के चलते पुलिस ने कोठालगेट पर ही मसूरी आने वाले वाहनों को रोका। देर शाम तक सैलानी मसूरी नहीं पहुंच पाए। जो सैलानी शनिवार सुबह मसूरी के लिए रवाना हुए थे उन्हें आईटीबीपी गेट पर ही वाहन रोकने पड़े।

रोडवेज की बस सेवाओं ने गज्जी बैंड से वापसी की। शहर से दून जाने वाले यात्रियों को पैदल ही गज्जी बैंड की ओर जाना पड़ा। सीओ मसूरी जया बलूनी ने बताया कि मसूरी में भारी हिमपात के चलते वाहनों को कोठालगेट पर रोका गया।

भारी बर्फबारी से मालरोड, मसूरी-देहरादून मार्ग एवं लंढौर में कई दर्जन पेड़ टूट गए। लंढौर में भारी बर्फ से लदा पेड़ गिरने से दो वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। मसूरी-दून मार्ग पर पेड़ टूटे होने के कारण वाहन चालकों को दिक्कतें हुईं।

होटल व्यवसायियों के चेहरे खिले
भारी हिमपात से होटल व्यवसायियों और व्यापारियों के चेहरे खिल गए। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के सदस्य संदीप सहानी ने कहा कि मसूरी शहर में वर्ष 2002 के बाद से पहली बार रिकॉर्ड हिमपात हुआ है।

इससे उम्मीद है कि आपदा के चलते मंदा पड़ा पर्यटन व्यवसाय फिर से गति पकड़ेगा। इतिहासकार गोपाल भारद्वाज का कहना है कि कई वर्षों के बाद मसूरी में अच्छी बर्फबारी देखने को मिली।

तलहटी पर बसे गांव भी बर्फ से लकदक

जौनसार बावर की ऊंची पहाड़ियों के साथ ही तलहटी पर बसे गांव भी बर्फ से लकदक हो गए हैं। शुक्रवार रात 11 से शनिवार शाम 4 बजे तक क्षेत्र में भारी बारिश होती रही। चकराता छावनी बाजार कड़ाके की ठंड की चपेट में है।

यहां पर शनिवार सुबह 7 बजे से शाम 3.30 बजे तक लगातार 8 घंटे हिमपात जारी रहा। क्षेत्र में 2 फुट तक बर्फ गिर चुकी है। सर्दी से बचने के लिए लोग घरों में दुबके रहे। लोगों को अलाव का सहारा लेना पड़ा। वहीं लोहारी, लोखंडी, कोटीकनासर की ऊंची पहाड़ियों पर 6 से 7 फुट तक बर्फबारी हुई है।

बर्फबारी के चलते ऊंचाई वाले इलाकों में खूब सैलानी पहुंच रहे हैं। शनिवार को चकराता का न्यूनतम तापमान -03 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। विकासनगर का न्यूनतम तापमान 04 डिग्री रिकार्ड किया गया।

इन गांवों में हुआ हिमपात
ऊंची पहाड़ियों के साथ ही इनकी तलहटी पर बसे गांवों में भी हिमपात हुआ है। भरम खत के ठारठा, कांडोई, भरम, कुनवा, पिंगुवा, गोरछा, बेगी, बागनी, बुल्हाड़, डीडा, नोहरा, कावा, उटेड़ा, सिलगांव खत के डांगुठा, पटियूड़, भुनाड़, ऐठाड़, भटाड़, भूट, फनार, ओभराशेर, बगूर, लोकाड़, डिनराड़, देवघार खत के पटाला, शाशगीर, डेरसा, प्यूनल, चोरीलानी समेत कुल 30 से अधिक गांवों में बर्फबारी होने से जनजीवन ठप हो गया है। लोग घरों में कैद हो गए हैं।

32 साल बाद हुए बर्फबारी के दीदार

शनिवार सुबह से जारी बर्फबारी के कारण विकासनगर के करीब एक दर्जन गांव ऐसे हैं जहां पर करीब 32 साल बाद लोगों को बर्फ देखने को मिली है। ग्लोबल वॉर्मिंग के बीच इतने साल बाद हुई बर्फबारी को लोग शुभ संकेत से जोड़कर देख रहे हैं।

कालसी ब्लाक के अलसी, नेवी, किमोटा, कोठा तारली, रानीगांव, सैंज, कोफ्टी, भुग्ताड़ समेत एक दर्जन गांव ऐसे हैं जहां पर करीब 32 साल बाद बर्फबारी हुई है। यहां पर करीब पांच इंच तक बर्फ गिरी है। अलसी के 65 वर्षीय सिंगाराम बिष्ट और मलेथा के 75 वर्षीय गुमान सिंह का कहना है कि करीब 32 साल पहले गांव में आखिरी बार बर्फ देखी थी।

इसके बाद आज ही गांव में बर्फ पड़ती देख रहे हैं। इन गांवों में एक से दो फीट बर्फ पड़ी है। युवाओं में भी पहली बार बर्फ देख उत्साह बना हुआ है। महेंद्र सिंह बिष्ट, रण सिंह राठौर आदि का कहना है कि बुजुर्गों से ही सुना था कि गांव में बर्फ पड़ा करती थी। आज पहली बार बर्फ पड़ते देख रहे हैं।

1981 में साहिया तक गिरी थी बर्फ
इस साल जहां कई गांवों में 32 साल बाद बर्फ पड़ी है। वहीं 1981 में साहिया तक बर्फ पड़ा करती थी। बुजुर्गों का कहना है कि 1981 में साहिया में 6 इंच तक बर्फ पड़ी थी।

मंदिरों में की देव स्तुति
लाखामंडल इलाका भी 25 साल बाद बर्फ से ढक गया। इतने वर्षों बाद इलाके में बर्फ पड़ते देखकर लोगों में उत्साह है। उन्होंने गांव में बर्फ गिरने की खुशी में पौराणिक शिव मंदिर में ढोल दमाऊ के साथ विशेष पूजा-अर्चना की। स्थानीय निवासी बाबूराम शर्मा ने कहा कि ग्रामीणों ने देवता से हर साल गांव में बर्फबारी की कामना की।
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फसलों के लिए मुफीद बारिश

क्षेत्र में लंबे अर्से बाद हुई झमाझम बारिश से काश्तकारों के चेहरे पर रौनक आ गई है। बारिश से जहां काश्तकारों को पाले की मार से राहत मिलेगी वहीं फसल के उत्पादन में भी इजाफे की उम्मीद है। खासतौर से यह बारिश मटर, गेहूं और दलहनी फसलों के लिए मुफीद मानी जा रही है।

4 फुट तक पड़ी बर्फ, 18 घंटे से बिजली गुल
त्यूनी। भारी बर्फबारी ने भरम क्षेत्र के बाशिंदों की दुश्वारियां बढ़ा दी हैं। बर्फबारी से क्षेत्र के 14 गांवों का संपर्क पूरी तरह से अन्य इलाकों से कट गया है। पिछले 18 घंटे से क्षेत्र की बिजली भी गुल है। लोगों को ठिठुरते हुए दिन काटना पड़ रहा है। यहां पर 4 फुट तक बर्फ जमी हुई है।

बिजली ठप होने से संचार सेवा भी जवाब दे गई है। ऐसे में 14 गांवों के 300 परिवार पूरी तरह से अलग-थलग पड़े हैं। गांव में पहले ही रसोई गैस नहीं पहुंच पा रही थी ऐसे में अब बर्फबारी होने से लकड़ी भी नहीं मिल पा रही है। लोगों के सामने चूल्हा जलाने का संकट भी खड़ा हो गया है।

नलों में पानी भी जम चुका है। लोगों को बर्फ पिघलाकर पानी पीना पड़ रहा है। आत्माराम सास्वत, हरि सिंह, बहादुर सिंह आदि कहना है कि बर्फबारी के कारण पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है। एसडीएम एनएस डांगी ने कहा कि संबंधित विभागों को आपूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए गए ह्रैं।
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