डॉ. स्मिता शाह ऐसा नाम है, जिसने लंदन में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इस वक्त ग्रीनविच में प्रैक्टिस कर रहीं डा. स्मिता जनरल डेंटल सर्जन हैं। उनके खाते में एक और उपलब्धि जुड़ी है। वह रॉयल कालेज ऑफ सर्जंस लंदन की सदस्य भी हैं।
मूल रूप से कुमाऊं से ताल्लुक रखने वाली स्मिता का बचपन हल्द्वानी, नैनीताल में बीता। उन्होंने डा. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी आगरा से 2005 में न सिर्फ स्नातक किया, बल्कि टॉपर रहते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया। कुछ समय के लिए वह ऋषिकेश स्थित सीमा डेंटल कालेज में लेक्चरर भी रहीं। इस बीच उन्होंने आगे बढ़ने की जद्दोजहद जारी रखी।
छह साल पहले यानी वर्ष 2008 में यूके में इंटरनेशनल क्वालिफाइंग एग्जाम के जरिए उन्होंने अपने पांव वहां जमा लिए। एमजेडीएफ एग्जाम पास किया और रॉयल कालेज आफ सर्जंस का सदस्य होने में कामयाबी हासिल की। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच लगातार आगे बढ़ना आसान नहीं था, लेकिन वह अपनी राह पर कायम हैं।
लौटना चाहती हैं उत्तराखंड
डा. स्मिता भले ही लंदन में प्रैक्टिस कर रही हैं, लेकिन उनका मन उत्तराखंड में बसता है। वह एक दिन यहां लौटना चाहती हैं। हल्द्वानी, नैनीताल उन्हें याद आता है। यहां बिताया समय उन्हें आज भी सबसे ज्यादा अजीज है। कुल मिलाकर एक दिन अपने उत्तराखंड लौटने का सपना देखने के पीछे यही वजह है।
महिला शक्तिस्वरूपा, आगे बढ़े
डॉ. स्मिता के बकौल महिला शक्तिस्वरूपा है। वह चाह लें, तो ऐसी कोई बाधा नहीं, जो उसका रास्ता रोक सके। सबसे पहली चीज है कि वह लक्ष्य निर्धारित करे और फिर उसे पूरा करने के लिए सारे प्रयास झोंक दे।