प्रदेश में अधिकांश पुलिसकर्मियों के पास वर्दी के अलावा कोई पहचान नहीं है। दरअसल, पुलिस कर्मियाें को कई सालों से स्मार्ट आईडी कार्ड (परिचय पत्र) नहीं मिल पाए हैं। ऐसे में सुरक्षा घेरे में बड़ी चूक से इंकार नहीं किया जा सकता है, वो भी उस परिस्थिति में जब पुलिस वर्दी बिना रोक-टोक कहीं से भी खरीदी जा सकती है। स्मार्ट आईडी कार्ड इलेक्ट्रानिक होने के कारण कहीं से भी किसी भी पुलिस कर्मी की पूरी जानकारी जुटाई जा सकती है।
उत्तराखंड में 2011 के बाद से पुलिसकर्मियों, हेड कांस्टेबल और रेंकर दारोगाओं के स्मार्ट आईडी कार्ड नहीं बन पाए हैं। वहीं, इससे पहले बने अधिकांश पुलिसकर्मियों के आईडी कार्ड या तो खराब हो चुके हैं या खो गए हैं। सूत्रों का कहना है कि नए आई कार्ड के लिए पुलिसकर्मियों से कई बार फार्म तो भरवाए गए, लेकिन उनके कार्ड नहीं बन पाए। इसका कारण कार्ड बनाने वाली मशीन का खराब होना बताया जा रहा है। आईजी मुख्यालय की तरफ से जारी होने वाले कार्ड में नाम के अलावा इंप्लाई कोड, ब्लड ग्रुप, डेट आफ बर्थ, ज्वाइनिंग डेट के अलावा स्थायी पता दर्ज होता है।
जिलों में पुलिस सम्मेलन के दौरान पुलिस कर्मी परिचय पत्र जारी न होने का मामला कई बार उठा चुके हैं, लेकिन मुख्यालय की नींद नहीं टूटी। ऐसे में वर्दी ही पुलिस कर्मियों की एक मात्र पहचान रह गई। इन्हीं पुलिस कर्मियों पर वीवीआईपी सुरक्षा के अलावा कानून व्यवस्था की ड्यूटी का जिम्मा भी है। सिर्फ वर्दी के सहारे ही पुलिस कर्मियों की पहचान खतरे से खाली नहीं, क्योंकि वर्दी आसानी से बाजार में खरीदी जा सकती है। परिचय पत्र न होने के कारण पुलिस कर्मियों को सरकारी सेवाओं का लाभ लेने में भी काफी दिक्कत झेलनी पड़ती है।
मशीन खराब होने के कारण काफी समय तक स्मार्ट आईडी कार्ड नहीं बन पाए थे। अब मशीन ठीक हो गई है। जिले वार कार्ड बनाने का काम शुरू हो गया है। फिलहाल अल्मोड़ा जिले के पुलिस कर्मियों का कार्ड बनाने का काम चल रहा है। यह भी व्यवस्था है कि यदि किसी पुलिस कर्मी को परिचय पत्र की जरूरत है तो वह जिले के कप्तान से बनवा सकते हैं।
- जीएस मत्तोलिया, पुलिस महानिरीक्षक
आईडी कार्ड बिना यह है दिक्कत
- मुख्यमंत्री और राजभवन में एंट्री वर्जित
- सरकारी ऋण लेने में बनता है मददगार
- पासपोर्ट बनवाने के लिए भी यह जरूरी
- रेल यात्रा में भी स्मार्ट कार्ड का महत्व