उप जिला अस्पताल में रोजाना औसतन छह मरीज टाइफाइड के संक्रमण से ग्रस्त मिल रहे हैं। इनमें बच्चे और वयस्क दोनों समान संख्या में शामिल हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक दूषित पानी और भोजन के कारण टाइफाइड होता है। मानसून सीजन में टाइफाइड की चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है।
उप जिला अस्पताल की जनरल ओपीडी में रोजाना 100 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से आधे मरीज बुखार, सर्दी, जुकाम, वायरल फीवर से पीड़ित हैं। वहीं, जांच करवाने कुछ मरीज टाइफाइड से ग्रस्त मिल रहे हैं। रोजाना ऐसे पांच से सात मरीजों की टाइफाइड जांच रिपोर्ट पाॅजिटिव आ रही है।
फिजिशियन डॉ. उमंग नौटियाल ने कहा कि इन दिनों की टाइफाइड के मरीजों की दैनिक संख्या करीब छह है। टाइफाइड का संक्रमण साल्मोनेला टाइफी नाम के जीवाणु के कारण होता है। यह जीवाणु दूषित पानी या भोजन में पनपता है। दूषित पानी या भोजन का सेवन करने वाला व्यक्ति संक्रमणग्रस्त हो जाता है। टाइफाइड का अगर समय पर उपचार न किया जाए तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
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लक्षण
- सिरदर्द
- पेट दर्द
- दस्त या कब्ज
- भूख न लगना
- कमजोरी
- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
- मितली
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गंभीर परिणाम
आंतों में छेद, रक्स्त्राव, सेप्सिस, अन्य अंदरूनी अंगों में संक्रमण
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बचाव
- किसी भी सतह को छूने के बाद हाथों को धोएं
- बाहर भोजन करने से बचें
- फलों और सब्जियों को अच्छी तरह से धोने के बाद उनका सेवन करें
- उबाल कर ठंडा किया या फिल्टर पानी ही पीएं
- खुले में बिकने वाले कटे फल, सब्जी, फास्ट फूड के सेवन से बचें
- ताजा और सुपाच्य भोजन करें
- टीकाकरण जरूर कराएं