इस बार मानसून में न सही, लेकिन अगले मानसून में उत्तराखंड में मौसम को पढ़ पाना वैज्ञानिकों के लिए और आसान हो जाएगा। अगले साल प्रदेश में दो डॉप्लर रडार काम करना शुरू कर देंगे। जिसके बाद मौसम की स्थानीय स्तर पर भविष्यवाणी और अधिक सटीक हो जाएगी। विश्व बैंक के सहयोग से प्रदेश में उत्तराखंड हाइड्रोमेट परियोजना शुरू की गई थी।
इसमें भारतीय मौसम विभाग से एमओयू किया गया था। इसके तहत प्रदेश में करीब 180 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और रेन गेज या बारिश मापी स्थापित किए गए हैं। इस समय इनमें से 100 से ज्यादा केंद्रों से जानकारी मिलने लगी है और आईएमडी को डाटा भी भेजा जा रहा है। इसका सबसे अधिक फायदा चार धाम यात्रियों को होगा।
वहीं, अच्छी खबर यह भी है कि मुक्तेश्वर में स्थापित डॉप्लर रडार से अब टेस्टिंग शुरू कर दी गई है। इसी तरह प्रदेश में एक और डॉप्लर रडार स्थापित किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले मानसून में इन दोनों के शुरू होने से मौसम का अंदाजा लगाने में खासी आसानी हो जाएगी।
100 और का प्रस्ताव भेजा
राज्य आपदा प्रबंधन के अधिकारियों के मुताबिक हाइड्रोमेट के तहत 100 और ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन व रेन गेज स्थापित करने का प्रस्ताव आईएमडी को भेजा जा चुका है। जिससे स्थानीय मौसम का अनुमान लगाना काफी आसान हो जाएगा।
अभी हम आईएमडी पूना को डाटा भेज रहे हैं। फॉरकास्ट का अधिकार उन्हीं का है। इतना जरूर है कि सौ से अधिक स्टेशन से डाटा जारी होने से फॉरकास्टिंग और अधिक सही हुई है।
- गिरीश चंद्र जोशी, वरिष्ठ परामर्शदाता, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण