शीश राम का कहना है कि टीका लगने के बाद बच्ची के मुंह से लार निकली। कुछ देर बाद वे बच्ची को घर ले गए, मगर घर में बच्ची ने दूध नहीं पीया। इस पर वे बच्ची को झाड़फूंक के लिए ले गए। शाम करीब पांच बजे बच्ची की मौत हो गई। बच्ची का पिता चंचल कुमार दिल्ली में होटल में काम करता है। शुक्रवार को बच्ची आरोही का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
ये है पेंटावैलेंट वैक्सीन
पेंटावैलेंट वैक्सीन फाइव-इन-वन वैक्सीन है। इसमें पांच अलग-अलग वैक्सीन को एक में संयोजित किया जाता है। यह टीका पांच जानलेवा (डिप्थीरिया, काली खांसी, टेटनस, हेपेटाइटिस-बी और एन्फ्लुएंजा) बीमारियों से रक्षा करता है। इससे नवजात शिशुओं की रोध प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। सामान्य रूप से ये तीन टीके 6, 10 और 14 सप्ताह की आयु में लगाए जाते हैं।
बच्ची की मौत की जानकारी लगने पर एसीएमओ डॉ.इंद्रजीत पांडेय के नेतृत्व में एक टीम को जांच के लिए बरकुम भेजा गया है। जांच रिपोर्ट के बाद ही मौत की असल वजह पता चलेगी। तामली स्वास्थ्य केंद्र से मिली जानकारी से लगता है कि मौत का इस टीकाकरण से कोई संबंध नहीं है।
-डॉ.आरके जोशी, सीएमओ, चंपावत