उत्तराखंड के मलेथा में स्टोन क्रशर के विरोध में सीता देवी का आमरण अनशन नौवें दिन भी जारी रहा। अब तक उनका साढ़े पांच किलोग्राम वजन घट चुका है।
ग्रामीण 22 दिसंबर से मलेथा तिराहे पर धरना दे रहे हैं। आंदोलनकारी सरकार से स्टोन क्रशर संचालन के निरस्तीकरण का शासनादेश जारी करने की मांग कर रहे हैं। मांग पर कार्रवाई नहीं होने पर 50 वर्षीय सीता देवी 20 जनवरी से आमरण अनशन पर है। बुधवार को कोतवाल एएस रावत और चिकित्सक विनय त्यागी धरनास्थल पर पहुंचे।
चिकित्सक ने आंदोलनकारी का स्वास्थ्य परीक्षण किया। मंगलवार की तुलना में बुधवार को आंदोलनकारी का वजन आधा किलोग्राम कम हो गया है। अनशनकारी सीता देवी ने कहा कि वह हिम्मत नहीं हारने वाली। शासनादेश जारी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। सीता देवी के समर्थन में ग्राम प्रधान शूरवीर सिंह, विजय सिंह रावत, देवेश्वरी देवी, सतेश्वरी देवी और चंदा बिष्ट आदि क्रमिक अनशन पर बैठे।
अनशन स्थल पर ही दाल पिसाई की रस्म
कीर्तिनगर। स्टोन क्रशर के विरोध में चल रहे आंदोलन के साथ-साथ महिलाएं गांव में आयोजित विवाह समारोह में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। शादियों में परंपरानुसार पकोड़ी के लिए उड़द की दाल पिसी जाती है।
इस काम को महिलाएं ही करती हैं। आंदोलन पर असर न पडे़ और काम भी पूरा हो जाए, इसलिए अनशन स्थल पर महिलाएं सिल-बट्टे लेकर पहुंच रही हैं। यहीं पर दाल पिसाई की रस्म पूरी कर रही हैं।
मलेथा के आंदोलन को दिया समर्थन
स्टोन क्रशरों के विरोध में मलेथा गांव में चल रहे आंदोलन को मानव कृषि एवं पर्यावरण सामंजस्य समिति (शेप) ने समर्थन दिया है। समिति के सचिव शिव प्रसाद डबराल ने बताया कि जनता के प्रति सरकार की नीति और नियति दोनों में खोट है।
उन्होंने कहा कि गुरुवार को समिति के देवेंद्र ध्यानी, अनिल सती, विनीता भट्ट सहित अन्य लोग अनशन पर बैठी सीता देवी को समर्थन देने मलेथा गांव पहुंचेंगे। डबराल ने कहा कि यह क्रशर पूरी तरह से गलत हैं, चंद लोगों को लाभ दिलाने के लिए सरकार इन क्रशरों को बढ़ावा दे रही है।
पहाड़ में कृषि को बढ़ावा देने और छोटे-छोटे उद्योगों के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के बजाय सरकार वहां के लोगों को बर्बाद और उजाड़ने जैसे संवेदनहीन फैसले ले रही है। कहा कि इस आंदोलन के समर्थन में पूरे प्रदेश से समिति समर्थन जुटाएगी।