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उत्तराखंडः जन्म दिन पर घर पहुंचेगा शहीद हिमांशु का पार्थिव शरीर, सिक्किम हादसे में गई थी जान

Fri, 02 Jul 2021 01:20 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काशीपुर

सार

हेमपुर डिपो की पांडेय कॉलोनी निवासी हिमांशु नेगी की नियुक्ति 27 मार्च 2019 को 7-कुमाऊं रेजीमेंट में बतौर सिपाही हुई थी।
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शहीद हिमांशु - फोटो : अमर उजाला
सिक्किम में सेना का वाहन खाई में गिरने से कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात काशीपुर निवासी जवान हिमांशु नेगी शहीद हो गए। उनकी शहादत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। शहीद जवान का पार्थिव शरीर शुक्रवार देर रात तक काशीपुर पहुंचने की संभावना है। नियति का खेल देखिए कि दो जुलाई को शुक्रवार के दिन ही हिमांशु का जन्म दिन भी है। हेमपुर डिपो की पांडेय कॉलोनी निवासी हिमांशु नेगी की नियुक्ति 27 मार्च 2019 को 7-कुमाऊं रेजीमेंट में बतौर सिपाही हुई थी। जम्मू कश्मीर में रहने के बाद वह वर्तमान में पश्चिमी बंगाल की बीनागुड़ी पोस्ट पर तैनात थे। 45 दिन का अवकाश पूरा करने के बाद हिमांशु दो जून को ही ड्यूटी पर लौटे थे। बुधवार सुबह 11 बजे रेजीमेंट के कमांडिंग ऑफिसर ने हिमांशु की शहादत की खबर उसके परिजनों को दी। शहीद नेगी के पिता हीरा सिंह ने बताया कि हादसे में शहीद और घायल हुए जवान सेना के ट्रक में सवार थे। ये गंगटोक की तरफ जा रहे थे कि 17 मील के निकट वाहन असंतुलित होकर 600 फीट गहरी खाई में जा गिरा। पिता हीरा सिंह ने बताया कि शुक्रवार देर रात तक बेटे का शव काशीपुर लाए जाने की उम्मीद है। दो जुलाई को शुक्रवार के दिन शहीद जवान हिमांशु नेगी का 21वां जन्मदिन है और इसी दिन उनका शव उनके घर पहुंचेगा।
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शहीद हिमांशु - फोटो : फाइल फोटो
सैन्य सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को बागडोगरा से शहीद का शव सेना के विशेष विमान से दिल्ली लाया जाएगा। शाम सात बजे दिल्ली एयरपोर्ट से जवान का शव एंबुलेंस से काशीपुर स्थित हेमपुर डिपो के पास पांडेय कॉलोनी पहुंचेगा। शनिवार को सैन्य सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया जाएगा। बच्चों की तालीम और रोजगार की तलाश में पहाड़ से पलायन कर हेमपुर में आकर बसे हीरा सिंह को बेटे के सेना में भर्ती होने के बाद अपने परिवार के हालात सुधरने की आस जगी थी। तंगहाली से जूझ रहे मां-बाप और भाई-बहनों की आंखों में हिमांशु ने तमाम उम्मीदें जगाई थीं। रुंधे गले से पिता हीरा सिंह अब यही कह रहे हैं कि हिमांशु बहुत बड़े-बड़े सपने दिखाकर परिवार को बेसहारा छोड़कर चला गया।
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शहीद हिमांशु - फोटो : फाइल फोटो
मूल रूप से ग्राम मसमोली, तहसील स्याल्दे (अल्मोड़ा) निवासी हीरा सिंह नेगी अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने और रोजगार की तलाश में काशीपुर आकर बस गए थे। सात साल पहले उन्होंने पांडेय कॉलोनी में मकान बनाया। एक बिल्डर के यहां चार हजार रुपये की पगार पर नौकरी की। परिवार की गाड़ी चलाने के लिए पत्नी कमला ने भी मजदूरी की। चार बच्चों के अलावा 90 साल की बूढ़ी मां सरुली देवी की देखरेख की जिम्मेदारी भी इस दंपती ने बखूबी निभाई। छोटा बेटा चंदन दिव्यांग है, मझले बेटे वीरेंद्र के भी हाथ में रॉड पड़ी है। बेटी दीपा रामनगर महाविद्यालय से बीएससी प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही है।

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शहीद हिमांशु के गमगीन माता-पिता - फोटो : अमर उजाला
बड़े बेटे हिमांशु के सेना में भर्ती होने के बाद परिवार की स्थिति में कुछ सुधार आया था। दो साल से बेटा परिवार का सहारा बना हुआ था। हिमांशु की इच्छा सेना में घातक कमांडो बनने की थी। इसके लिए वह लगातार अभ्यास कर रहा था। हिमांशु का कहना था कि कमांडो का काम बेहद रोमांचकारी होता है। खतरों से खेलने में उसे आनंद आता था। ऐसे में उसकी इच्छा एनएसजी में घातक कमांडो बनने की थी ताकि सीमा की सुरक्षा में अपना योगदान दे सके।
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शहीद हिमांशु के पिता - फोटो : अमर उजाला
पांडेय कॉलोनी के प्रधान धर्मेंद्र ने बताया कि हिमांशु बहुत ही मिलनसार और सहयोगी प्रवृत्ति का था। कुमाऊं रेजीमेंट में भर्ती होने के बाद उसने कॉलोनी के कई युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया। वह कॉलोनी के युवाओं को ट्रेनिंग के लिए अपने साथ पीरूमदारा एकेडमी में ले जाता था। छुट्टी आने पर वह युवाओं को सेना में भर्ती के टिप्स देता था। सेना की गाड़ी से गंगटोक की ओर रवाना होते समय हिमांशु ने अपना वीडियो व्हाटसएप पर अपलोड किया था। वीडियो में हिमांशु मस्ती के अंदाज में गाड़ी की खिड़की से कूद रहा है। 
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