उत्तराखंड सिडकुल घोटाले में देहरादून और ऊधमसिंहनगर जिलों की लेटलतीफी कम नहीं हुई है। चार साल बाद भी ये जिले 90 जांच फाइलों को दबाए बैठे हैं। उन्हें कई बार अल्टीमेटम भी दिया जा चुका है। कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया, लेकिन कोई वाजिब जवाब नहीं दिया गया।
वर्ष 2012 से 2017 तक सिडकुल के कामों में अनियमितता सामने आई थी। इसकी जांच के लिए वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एसआईटी का गठन किया था। डीआईजी गढ़वाल रेंज को इसका अध्यक्ष बनाया गया था। शुरूआती पड़ताल में पूरे प्रदेश में कुल 304 मामले अनियमितता के सामने आए। अलग-अलग जिलों से संबंधित इन मामलों की जांच चल रही है।
जांच में पता चला था कि सिडकुल के अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर मन माफिक लोगों को काम बांटा था। यही नहीं ब्लैक लिस्टेड कंपनियों को भी यहां पर कई काम दे दिए गए थे। जिन कामों को स्थानीय कंपनियों से कराया जाना था उन्हें उत्तर प्रदेश की कंपनियों में बांट दिया गया।
इस तरह जांच करते हुए सभी जिलों ने 304 फाइलों में से 214 फाइलों का निपटारा कर लिया था। अब बची फाइलें केवल देहरादून और ऊधमसिंहनगर से ही संबंधित हैं। नवंबर 2020 से अब तक इन फाइलों के लिए जिले के अधिकारी तमाम बहाने बना रहे हैं। पिछले दिनों उन्हें 30 जून तक का समय दिया गया था, लेकिन जांच पूरी नहीं हो सकी।
गले नहीं उतर रहाकारण
डीआईजी गढ़वाल रेंज ने पिछले दिनों दोनों जिलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके जवाब में दोनों ने ही एक जैसा जवाब दिया। बताया कि टेक्निकल समिति अपनी रिपोर्ट नहीं दे पा रही है। इसका भी कारण बताया कि कोरोना काल में टेक्निकल समिति को यह समस्या आ रही है। जबकि, कोरोना संकट इन दो जिलों में नहीं बल्कि पूरे भारत में चल रहा है। अन्य जनपदों ने भी समय से अपनी जांच पूरी कर फाइलों को तैयार कर लिया है।
दोनों जिलों को काफी समय दिया गया था। कारण बताओ नोटिस का जवाब भी उन्होंने वाजिब नहीं दिया है। अब वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों को तलब किया जाएगा। इसके लिए भी अब अंतिम बार 48 घंटे का समय दिया गया है।
-नीरू गर्ग, डीआईजी गढ़वाल रेंज