जखोली विकासखंड की 24 ग्राम पंचायतों की 40 हजार आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है। घरों में लोग तड़के से आधी रात तक दूरस्थ स्रोतों से पानी जुटा रहे हैं।
एक दशक पूर्व जखोली ब्लाक के 36 ग्राम पंचायतों के लगभग 70 गांवों के लिए एक दशक पूर्व लगभग 19 करोड़ की दो पेयजल योजनाएं स्वीकृत की गई थी। जो आज तक पूरी नहीं हो पाई हैं। इसके अलावा जिले में 35 अन्य छोटी-बड़ी पेयजल योजनाएं हैं, जो वर्षो से निर्माण की राह ताक रही हैं, जिसमें तल्ला नागपुर पेयजल योजना भी शामिल हैं।
इस योजना से क्षेत्र के 50 से अधिक ग्राम पंचायतों को लाभ मिलना है लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण गांवों में लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। गांवों में सबसे बड़ी दिक्कत मवेशियों के लिए पानी जुटाने की हो रही है। पानी के अभाव में चाका, फलाटी और बुडोली में स्थिति सबसे बुरी है।
केस एक
वर्ष 2006 में सिलगढ़ क्षेत्र की बारह ग्राम पंचायतों की चौदह हजार की आबादी के लिए तैला-सिलगढ़ पेयजल लाइन स्वीकृत की गई। 6 करोड़ 23 लाख की योजना पर पेयजल निगम ने वर्ष 2009-10 में कार्य शुरू किया। पहले फेज में कुछ किमी लाइन बिछी। दूसरे फेज में वर्ष 2011-12 स्टोर टैंक बनाए गए। लेकिन लाइन अधूरी पड़ी है। जबकि 6 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
केस दो
वर्ष 2005-06 में भरदार पट्टी के 12 ग्राम पंचायतों की करीब 20 हजार की आबादी के लिए रौंठिया-जवाड़ी पेयजल योजना स्वीकृत की गई। 1294 लाख रुपये खर्च के बाद भी 10 वर्ष से योजना पूरी नहीं हो पाई है। पेयजल निगम द्वारा 11 करोड़ का रिवाइज एस्टीमेट पुन: शासन को भेजा गया है।
रौंठिया-जवाड़ी पेयजल योजना को पूरा करने के लिए 11 करोड़ का रिवाइज एस्टीमेट शासन को भेजा गया है। चार माह बीत जाने के बाद भी स्वीकृति नहीं मिल पाई है, जिस कारण कार्य रुका है। तैला-सिलगढ़ योजना का कार्य अंतिम चरण में है। अन्य योजनाओं पर भी कार्य तेजी से हो रहा है।
- एसके बरनवाल, अधिशासी अभियंता पेयजल निगम रुद्रप्रयाग